
Breaking Today, Digital Desk : क्या आपने कभी सोचा है कि अपने ही देश का एक हिस्सा किसी सेना के लिए ‘नो-गो ज़ोन’ कैसे बन सकता है? पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है। यह इलाका धीरे-धीरे पाकिस्तानी सेना के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, क्योंकि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) वहाँ अपना प्रभाव लगातार बढ़ा रहा है।
अभी कुछ समय पहले तक, पाकिस्तान सेना को इस क्षेत्र में काफी हद तक नियंत्रण हासिल था। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। ऐसा लगता है कि TTP के लड़ाके एक बार फिर इस क्षेत्र में अपनी जड़ें मजबूत कर रहे हैं, जिससे स्थानीय आबादी और सुरक्षा बलों दोनों के लिए चिंता बढ़ गई है।
आखिर हो क्या रहा है?
जानकारों का मानना है कि अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद से TTP को काफी बढ़ावा मिला है। सीमा पार से उन्हें समर्थन मिल रहा है और वे खैबर पख्तूनख्वा के दूरदराज के इलाकों में अपनी गतिविधियां बढ़ा रहे हैं। वे छोटे-छोटे हमलों से लेकर बड़े अभियानों तक, सब कुछ कर रहे हैं, जिससे पाकिस्तानी सेना को पीछे हटना पड़ रहा है।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, TTP के आतंकी अब सड़कों पर चेकपोस्ट लगा रहे हैं, लोगों को धमका रहे हैं और अपने ‘कानून’ लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। यह स्थिति उन लोगों के लिए बहुत खतरनाक है जो वहां रहते हैं और काम करते हैं। सेना और सरकार के लिए यह एक मुश्किल स्थिति है, क्योंकि उन्हें अपने ही देश के भीतर शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
बढ़ती चिंताएं और भविष्य की राह
यह सिर्फ एक सुरक्षा चुनौती नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय एकता और संप्रभुता पर भी सवाल उठाती है। अगर TTP इसी तरह अपने पैर पसारता रहा, तो इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है। पाकिस्तान सरकार और सेना को इस स्थिति से निपटने के लिए एक ठोस रणनीति बनानी होगी। इसमें सिर्फ सैन्य कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक उपाय भी शामिल होने चाहिए ताकि स्थानीय लोगों को TTP के प्रभाव से बचाया जा सके।
यह देखना होगा कि पाकिस्तान इस बढ़ती चुनौती का सामना कैसे करता है। क्या वे इस क्षेत्र को फिर से अपने नियंत्रण में ले पाएंगे, या खैबर पख्तूनख्वा वाकई पाकिस्तान सेना के लिए एक ‘नो-गो ज़ोन’ बन जाएगा? समय ही बताएगा।




