
Breaking Today, Digital Desk : बिहार की राजनीति में ‘लालू’ नाम सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक युग का प्रतीक है। और जब यह नाम चुनावी मैदान में उतरता है, तो माहौल अपने आप गरमा जाता है। हाल ही में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने बिहार की चुनावी यात्रा का आगाज किया और उनका यह दौरा दानापुर में तो मानो तूफान ही ले आया। चारों तरफ से फूलों की वर्षा हो रही थी, ‘लालू यादव जिंदाबाद’ के नारे गूँज रहे थे और सड़कों पर ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि दानापुर थम सा गया।
भले ही लालू यादव अब पहले की तरह सक्रिय न दिखते हों और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे हों, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ और लोगों में उनका क्रेज आज भी बरकरार है। उनकी एक झलक पाने और उनके भाषण को सुनने के लिए लोग घंटों इंतजार करते रहे। यह उनके करिश्मे का ही कमाल है कि इतने सालों और तमाम विवादों के बावजूद उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है।
इस चुनावी यात्रा में लालू यादव ने अपने चिर-परिचित अंदाज में विरोधियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने बेरोजगारी, गरीबी और विकास के मुद्दों पर सरकार को घेरा। उनके भाषण में वही पुराना तेवर और गाँव-देहात की ठेठ भाषा का प्रयोग था, जो सीधे जनता के दिल में उतर जाती है। लोगों को आज भी उनमें अपना नेता दिखता है, एक ऐसा नेता जो उनकी समस्याओं को समझता है।
हालांकि, यह दौरा विवादों से भी अछूता नहीं रहा। लालू यादव पर अक्सर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं और इस बार भी भीड़ जुटाने और नियमों की अनदेखी करने को लेकर सवाल उठे हैं। लेकिन उनके समर्थक इन सब बातों की परवाह नहीं करते। उनके लिए लालू का चुनावी मैदान में आना ही सबसे बड़ी बात है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि लालू यादव की यह यात्रा बिहार की राजनीति में क्या रंग लाती है। क्या वे एक बार फिर अपनी पार्टी को सत्ता के शिखर पर पहुँचा पाएंगे, या यह सिर्फ उनके पुराने दिनों की याद दिलाकर रह जाएगी? फिलहाल तो इतना तय है कि लालू के मैदान में उतरने से बिहार का चुनावी रण और भी रोमांचक हो गया है।






