
Breaking Today, Digital Desk : ग़ाज़ा में सूरज हर रोज़ उगता है, लेकिन रोशनी के साथ उम्मीद लेकर नहीं आता. यहाँ की सुबहें बमबारी के खौफ और रातें भूख की पीड़ा में डूबी होती हैं. एक ऐसी ज़मीन, जो कभी ज़िंदादिली से धड़कती थी, आज मलबे के ढेर में तब्दील हो चुकी है, जहाँ इंसानियत ज़िंदा रहने के लिए हर पल एक नई जंग लड़ रही है.
सेटेलाइट से ली गई तस्वीरें इस भयावह हकीकत की गवाह हैं. एक समय जहाँ बच्चों के स्कूल, लोगों के घर और रौनक से भरे बाज़ार हुआ करते थे, वहाँ आज सिर्फ़ तबाही के निशान हैं. संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार, ग़ाज़ा का लगभग 60% बुनियादी ढाँचा या तो क्षतिग्रस्त हो गया है या पूरी तरह से नष्ट हो चुका है सड़कें, अस्पताल, और पानी की सप्लाई करने वाले सिस्टम तबाह हो चुके हैं, जिससे लोगों की ज़िंदगी और भी मुश्किल हो गई है
लेकिन इस तबाही से भी ज़्यादा दर्दनाक है भूख की चीखें, जो अब हर घर में गूँज रही हैं. ग़ाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, कुपोषण और भुखमरी से होने वाली मौतें, विशेषकर बच्चों में, लगातार बढ़ रही हैं कई परिवार ऐसे हैं जिन्हें कई-कई दिनों तक खाना नसीब नहीं होता. विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि ग़ाज़ा दुनिया का सबसे भूखा स्थान बनने की कगार पर है, और यहाँ अकाल का साया मंडरा रहा है.
इस संकट की सबसे मार्मिक तस्वीरें उन बच्चों की हैं, जिनकी आँखों में अब भूख की वीरानगी के सिवा कुछ नहीं बचा. कुपोषण ने हज़ारों बच्चों के शरीर को कंकाल में बदल दिया है स्वास्थ्य सेवाएँ लगभग ठप पड़ चुकी हैं, और जो कुछ अस्पताल बचे हैं, वे घायलों और भूखे लोगों से भरे पड़े हैं मानवीय सहायता पहुँचाने के रास्ते भी बेहद कठिन और खतरनाक हैं, जिसके चलते ज़रूरतमंदों तक मदद पहुँचाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है
एक तरफ़ इज़रायल का कहना है कि वह केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बना रहा है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है. आम नागरिक, विशेष रूप से महिलाएँ और बच्चे, इस संघर्ष का सबसे बड़ा खामियाजा भुगत रहे हैं यह सिर्फ़ एक ज़मीन का टुकड़ा नहीं है जो तबाह हो रहा है, बल्कि यह इंसानियत है जो हर रोज़ तिल-तिल कर मर रही है. दुनिया भर से युद्धविराम और मानवीय सहायता की अपीलें हो रही हैं, लेकिन ग़ाज़ा के लोगों के लिए हर गुज़रता पल मौत के और करीब ले जा रहा है.




