मासिक धर्म में सावन सोमवार व्रत, जानें क्या हैं नियम और कैसे करें शिव की आराधना…
Sawan Monday fast during menstruation, know what are the rules and how to worship Shiva...

Breaking Today, Digital Desk : सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान, विशेषकर सोमवार को, कई महिलाएं और अविवाहित कन्याएं भगवान शिव को प्रसन्न करने और मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत रखती हैं। हालाँकि, एक आम दुविधा जो कई महिलाओं के मन में रहती है, वह यह है कि क्या मासिक धर्म या पीरियड्स के दौरान सावन सोमवार का व्रत रखा जा सकता है।
शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पूजा-पाठ और मंदिर जाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। इसका एक कारण शुद्धता को माना जाता है, वहीं दूसरा कारण इस दौरान महिलाओं को शारीरिक आराम देना भी है। लेकिन जहाँ तक व्रत रखने की बात है, तो यदि महिला शारीरिक रूप से स्वस्थ महसूस कर रही है, तो वह व्रत रख सकती है।
पीरियड्स के दौरान कैसे करें व्रत और पूजन?
अगर आप मासिक धर्म के दौरान सावन सोमवार का व्रत रख रही हैं, तो कुछ नियमों का पालन कर सकती हैं:
मानसिक पूजा करें: आप सीधे तौर पर पूजा सामग्री को हाथ न लगाएं और न ही शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। इसके बजाय आप मानसिक रूप से भगवान शिव का ध्यान करें। आप दूर बैठकर शिव चालीसा का पाठ, शिव मंत्रों का जाप और भजन-कीर्तन कर सकती हैं।
कथा सुनें: व्रत का पूरा फल प्राप्त करने के लिए सोमवार व्रत की कथा सुनना आवश्यक माना जाता है। आप किसी दूसरे से कथा सुन सकती हैं या फिर डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर सकती हैं
संकल्प न तोड़ें: अगर आपने सावन के सभी सोमवार का व्रत रखने का संकल्प लिया है, तो मासिक धर्म के कारण इसे बीच में नहीं तोड़ना चाहिए। आप व्रत जारी रख सकती हैं।
दूसरों से कराएं पूजा: यदि संभव हो, तो आप अपने परिवार के किसी सदस्य से अपने नाम से पूजा करवा सकती हैं।
कौन नहीं रख सकता व्रत?
सावन सोमवार का व्रत कुछ विशेष परिस्थितियों में नहीं रखना चाहिए:
बीमार व्यक्ति: यदि कोई व्यक्ति बीमार है या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहा है, तो उसे व्रत रखने से बचना चाहिए।
गर्भवती महिलाएं: गर्भवती महिलाओं को भी उपवास न करने की सलाह दी जाती है।
शारीरिक रूप से कमजोर: यदि व्रत रखने से शारीरिक कष्ट बढ़ने की आशंका हो, तो व्रत नहीं रखना चाहिए।
अंततः, व्रत और पूजा का मूल भाव सच्ची श्रद्धा और भक्ति है। यदि आप शारीरिक नियमों का पालन करते हुए, मन से भगवान शिव का स्मरण करती हैं, तो आपकी पूजा और व्रत अवश्य स्वीकार्य होंगे।






