
कुछ दिनों पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी द्वारा निर्वाचन आयुक्त के संबंध में, मतदाता सूची के संबंध में पीपीटी इंडिया गठबंधन दलों के सामने और मीडिया के सामने काफी वैचारिक विमर्श के साथ व तैयारी के साथ किया गया प्रस्तुतीकरण काफ़ी अच्छा था।
पर इनकी शिकायत के बाद निर्वाचन आयोग द्वारा शपथ पत्र की मांग करना भी वाजिब है जबकि बौद्धिक वैचारिक विमर्श के इको सिस्टम द्वारा बार-बार यह कहना की शपथ पत्र देना गैर वाजिब है , यह एक मिथ्या विधवा प्रलाप है
क्योंकि किसी भी सरकारी संस्थान सरकारी अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध किसी भी कदाचार भ्रष्टाचार आदि का आरोप लगाने के पूर्व शिकायतकर्ता को शपथ पत्र देना विधिक व्यवस्था पहले से ही अनिवार्य किया गया है और ये सर्वविदित है।
पढ़े-लिखे महानुभावों से गुजारिश है कि वो अन्ना आंदोलन के केजरीवाल मंडी मंडली की तरह प्रतिदिन एक नया गुब्बारा शिकायत का हवा में उड़कर पब्लिक डोमेन में सुर्खियां तो बटोर सकते हैं पर राज्य/देश/समाज का कोई भला नहीं कर सकते हैं ।
नेता प्रतिपक्ष को भी गंभीर चिंतन की जरूरत है और इस बात पर भी ध्यान देने की कि वो कौन से लोग है जो बार बार ऐसी सलाह देतें है जो उनके उठाये जाने वाले सवालों पर ही प्रश्न चिन्ह खड़ा कर देतें हैं।






