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जसप्रीत बुमराह पर फिर गरमाई बहस, वर्कलोड मैनेजमेंट या देशसेवा से खिलवाड़…

The debate on Jaspreet Bumrah is heated again, workload management or playing with national service

Breaking Today, Digital Desk : भारतीय क्रिकेट के धुरंधर तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह एक बार फिर क्रिकेट पंडितों और प्रशंसकों के बीच चर्चा का केंद्र बन गए हैं। इस बार वजह उनकी गेंदबाजी नहीं, बल्कि उनका ‘वर्कलोड मैनेजमेंट’ है, जिसके चलते वह इंग्लैंड के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज के सभी मैचों में नहीं खेले। इस फैसले ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसमें एक तरफ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टीम मैनेजमेंट का अपने अनमोल खिलाड़ी को बचाने का तर्क है, तो दूसरी तरफ पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों की देश के लिए खेलने की दुहाई है।

आखिर BCCI क्यों दे रहा है ऐसी ‘छूट’? दिग्गज हैरान

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और चयनकर्ता संदीप पाटिल ने इस पूरे मामले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सवाल उठाया कि BCCI इस तरह की चीजों के लिए कैसे राजी हो रहा है? पाटिल ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “वर्कलोड मैनेजमेंट बकवास है। आप या तो फिट हैं या अनफिट।” उन्होंने अपने जमाने के खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि सुनील गावस्कर और कपिल देव जैसे महान खिलाड़ी कभी आराम नहीं मांगते थे और देश के लिए खेलने के लिए किसी भी दर्द को सहने के लिए तैयार रहते थे। पाटिल ने यहां तक कह दिया कि “जब आप अपने देश के लिए चुने जाते हैं, तो आप अपने देश के लिए मरते हैं। आप एक योद्धा हैं।”

इसी तरह की भावनाएं पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने भी व्यक्त की हैं। उनका मानना है कि एक बार टीम में चुने जाने के बाद आप मैच नहीं चुन सकते। उन्होंने कहा, “वर्कलोड तो होता है, लेकिन इस स्तर पर आपको इसे मैनेज करना होता है। आप देश के लिए खेल रहे हैं।”

क्या बुमराह को बचाना BCCI की मजबूरी है?

हालांकि, इस सिक्के का दूसरा पहलू भी है। पूर्व गेंदबाजी कोच भरत अरुण जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि बुमराह की अनोखी गेंदबाजी एक्शन और उनके चोटों के इतिहास को देखते हुए उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत है। उनका तर्क है कि बुमराह को लंबे समय तक भारतीय टीम की सेवा में बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि उनके काम के बोझ को सावधानी से प्रबंधित किया जाए। यह फैसला बुमराह को भविष्य के महत्वपूर्ण मैचों के लिए तरोताजा और पूरी तरह से फिट रखने की एक रणनीति का हिस्सा था।

दरअसल, बुमराह 2022 में अपनी पीठ की चोट के कारण लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहे थे और उनकी सर्जरी भी हुई थी। टीम प्रबंधन का मानना है कि एक ही गलती उनके करियर को खतरे में डाल सकती है। इसलिए, उन्हें आराम देना टीम के दीर्घकालिक हितों के लिए एक आवश्यक कदम था।

टीम से बढ़कर कोई नहीं: नई सोच की आहट

इस पूरी बहस के बीच, यह भी खबरें हैं कि नवनियुक्त मुख्य कोच गौतम गंभीर और BCCI अब “पिक एंड चूज” संस्कृति को खत्म करने के पक्ष में हैं। हाल ही में इंग्लैंड दौरे पर मोहम्मद सिराज के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि टीम किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं है। BCCI के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि खिलाड़ियों को यह संदेश दिया जाएगा कि वर्कलोड मैनेजमेंट के नाम पर महत्वपूर्ण मैचों को छोड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी, हालांकि तेज गेंदबाजों के कार्यभार प्रबंधन पर एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।

यह पूरा प्रकरण भारतीय क्रिकेट में एक बड़े वैचारिक द्वंद्व को उजागर करता है – जहां एक तरफ पुरानी पीढ़ी का देश के लिए “जान लगा देने” का जज्बा है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक क्रिकेट की व्यस्तता और खिलाड़ियों को चोटों से बचाने की वैज्ञानिक सोच है। बुमराह इस बहस का चेहरा बन गए हैं, और इसका नतीजा भारतीय क्रिकेट की भविष्य की दिशा तय कर सकता है।

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