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केवल बचपन में ही नहीं, हर उम्र में ज़रूरी है महिलाओं के लिए टीकाकरण…

Vaccination is necessary for women not only in childhood but at every age

Breaking Today, Digital Desk : स्वस्थ जीवन के लिए टीकाकरण को अक्सर बचपन से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो जीवन के हर पड़ाव पर महिलाओं की सेहत की रक्षा करती है। किशोरावस्था की शुरुआत से लेकर गर्भावस्था के नाजुक दौर और रजोनिवृत्ति के बाद तक, सही समय पर सही टीके लगवाना कई गंभीर बीमारियों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। महिलाओं के लिए उम्र के हर चरण में टीकाकरण की अपनी अहमियत है, जो न केवल उन्हें, बल्कि उनके होने वाले बच्चे को भी सुरक्षा प्रदान करता है।

यह लेख महिलाओं के जीवन के तीन महत्वपूर्ण चरणों – किशोरावस्था, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के बाद – में आवश्यक टीकाकरणों की जानकारी प्रदान करेगा, ताकि वे अपनी सेहत को लेकर एक सूचित निर्णय ले सकें।

किशोरावस्था: भविष्य के स्वास्थ्य की नींव

किशोरावस्था (9-18 वर्ष) एक ऐसा समय है जब लड़कियों के शरीर में कई बदलाव होते हैं। यह भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव के लिए टीकाकरण का एक महत्वपूर्ण चरण है।

ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन: यह टीका सर्वाइकल कैंसर को रोकने के लिए बेहद ज़रूरी है, जो भारतीय महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। यह टीका 9 से 14 साल की उम्र की लड़कियों को दो खुराक में दिया जाता है। अगर 15 साल या उससे ज़्यादा की उम्र में यह टीका लगवाया जाता है, तो तीन खुराकों की ज़रूरत होती है। भारत सरकार ने भी लड़कियों के लिए एचपीवी टीकाकरण को राष्ट्रीय प्राथमिकता के तौर पर घोषित किया है।

टेटनस, डिप्थीरिया और पर्टुसिस (Tdap/Td): 10-12 साल की उम्र में टीडीएपी का एक बूस्टर डोज़ लगवाने की सलाह दी जाती है। इसके बाद हर 10 साल में एक टीडी बूस्टर डोज़ लगवानी चाहिए।

मीजल्स, मम्प्स और रूबेला (MMR) वैक्सीन: अगर बचपन में यह टीका नहीं लगा है, तो किशोरावस्था में इसकी दो खुराक दी जा सकती हैं। रूबेला संक्रमण, अगर गर्भावस्था के दौरान हो जाए, तो गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है।

हेपेटाइटिस बी वैक्सीन: जिन लड़कियों को बचपन में यह टीका नहीं लगा है, उन्हें यह टीका ज़रूर लगवाना चाहिए। यह लिवर को हेपेटाइटिस बी वायरस के संक्रमण से बचाता है, जो आगे चलकर लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का कारण बन सकता है।

टाइफाइड वैक्सीन: टाइफाइड एक पानी से होने वाली बीमारी है, और भारत में इसके मामले आम हैं। टाइफाइड कंजुगेट वैक्सीन (TCV) 6 महीने की उम्र से ही दी जा सकती है और यह लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करती है।

गर्भावस्था: माँ और बच्चे दोनों की सुरक्षा

गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण न केवल गर्भवती महिला को संक्रमण से बचाता है, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी जन्म के शुरुआती महीनों के लिए सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

टेटनस, डिप्थीरिया और पर्टुसिस (Tdap) वैक्सीन: गर्भावस्था के 27वें और 36वें सप्ताह के बीच टीडीएपी का एक टीका लगवाने की पुरज़ोर सलाह दी जाती है। यह माँ और नवजात शिशु दोनों को टिटनेस, डिप्थीरिया और काली खांसी (पर्टुसिस) से बचाता है। काली खांसी नवजात शिशुओं के लिए जानलेवा हो सकती है।

इन्फ्लूएंजा (फ्लू) वैक्सीन: गर्भावस्था के दौरान फ्लू का संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। निष्क्रिय इन्फ्लूएंजा वैक्सीन (फ्लू शॉट) गर्भावस्था के किसी भी चरण में लेना सुरक्षित है और इसकी सलाह दी जाती है।

टेटनस टॉक्साइड (TT) वैक्सीन: राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को टेटनस से बचाव के लिए टीटी के टीके लगाए जाते हैं।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एमएमआर (मीजल्स, मम्प्स, रूबेला) और चिकनपॉक्स जैसे कुछ टीके, जो जीवित वायरस से बने होते हैं, गर्भावस्था के दौरान नहीं दिए जाने चाहिए। आदर्श रूप से, महिलाओं को गर्भधारण की योजना बनाने से कम से कम एक महीने पहले ये टीके लगवा लेने चाहिए।

रजोनिवृत्ति और उसके बाद: सक्रिय और स्वस्थ जीवन के लिए

उम्र बढ़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है, जिससे कुछ बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, 50 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाओं के लिए भी टीकाकरण महत्वपूर्ण है।

न्यूमोकोकल वैक्सीन: यह वैक्सीन निमोनिया, मैनिंजाइटिस और खून के संक्रमण जैसे गंभीर न्यूमोकोकल रोगों से बचाती है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों और कुछ पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए इसकी सलाह दी जाती है। भारत में वयस्कों के लिए PCV13, PPSV23 और हाल ही में लॉन्च हुआ PCV20 टीका उपलब्ध है।

शिंगल्स (हर्पीज ज़ोस्टर) वैक्सीन: शिंगल्स एक दर्दनाक त्वचा रोग है जो उसी वायरस के कारण होता है जिससे चिकनपॉक्स होता है। 50 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वयस्कों के लिए शिंगल्स का टीका लगवाने की सलाह दी जाती है ताकि इस दर्दनाक स्थिति से बचा जा सके। शिंग्रिक्स (Shingrix) नामक एक प्रभावी टीका भारत में उपलब्ध है।

इन्फ्लूएंजा (फ्लू) वैक्सीन: फ्लू का वार्षिक टीका सभी उम्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर वृद्ध वयस्कों के लिए।

टेटनस-डिप्थीरिया (Td) बूस्टर: हर 10 साल में टीडी का बूस्टर शॉट लगवाना याद रखना चाहिए।

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