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तेंदुलकर पर बरसे पूर्व क्रिकेटर, कहा- गावस्कर होते तो हिला देते हिंदुस्तान…

Former cricketer lashed out at Tendulkar, said- If Gavaskar was here, he would have shaken India

Breaking Today, Digital Desk : भारतीय क्रिकेट के दो दिग्गज, सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर, अक्सर अपनी बल्लेबाजी की कला के लिए चर्चा में रहते हैं। लेकिन इस बार, क्रिकेट के मैदान से बाहर एक मुद्दे को लेकर दोनों की तुलना हो रही है। इंग्लैंड और भारत के बीच खेली जाने वाली ‘पटौदी ट्रॉफी’ का नाम बदलकर ‘एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी’ किए जाने के फैसले पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर करसन घावरी ने सचिन तेंदुलकर की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। घावरी का मानना है कि अगर तेंदुलकर की जगह गावस्कर होते, तो वे इस मामले पर चुप नहीं रहते और पूरे हिंदुस्तान को हिला देते।

एक साक्षात्कार में, घावरी ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि पटौदी ट्रॉफी का नाम बदलना एक महान क्रिकेटर का अपमान है। उन्होंने कहा कि यह सवाल कभी उठाया ही नहीं जाना चाहिए था। घावरी ने तेंदुलकर के कद की तुलना गावस्कर से करते हुए कहा कि गावस्कर अपने समय के एक महान खिलाड़ी थे और ऐसे मुद्दों पर हमेशा अपनी राय रखते थे। उनका मानना है कि तेंदुलकर को भी इस मामले में बोलना चाहिए था, खासकर जब ट्रॉफी का नाम उनके नाम पर रखा जा रहा है।

करसन घावरी ने जोर देकर कहा कि सुनील गावस्कर एक ऐसे व्यक्ति थे जो हमेशा अपने स्वाभिमान और क्रिकेट की परंपराओं के लिए खड़े होते थे। उनका मानना है कि अगर गावस्कर के साथ ऐसा होता तो वे इसे कभी स्वीकार नहीं करते और अपनी आवाज पुरजोर तरीके से उठाते। घावरी ने कहा कि गावस्कर अपने विचारों को व्यक्त करने से कभी नहीं डरते थे, चाहे वह क्रिकेट बोर्ड के खिलाफ हो या किसी अन्य शक्तिशाली संस्था के।

इस पूरी बहस ने एक बार फिर क्रिकेट जगत में खिलाड़ियों की भूमिका और उनके सामाजिक दायित्वों पर चर्चा छेड़ दी है। जहां कुछ लोग मानते हैं कि खिलाड़ियों को सिर्फ अपने खेल पर ध्यान देना चाहिए, वहीं अन्य का मानना ​​है कि सचिन तेंदुलकर जैसे महान खिलाड़ियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे क्रिकेट से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय रखें।

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