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राजनीतिक स्वार्थ पर राष्ट्रहित भारी, संसद को चलने दे – अमित शाह…

Breaking Today, Digital Desk : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकतंत्र में संवाद और बहस की अहमियत पर जोर देते हुए कहा है कि राजनीतिक हितों के लिए संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही को बाधित करना देशहित में नहीं है। दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि विरोध के नाम पर सदन को सत्र-दर-सत्र न चलने देने की परंपरा लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

शाह ने कहा कि संसद और विधानसभाएं केवल इमारतें नहीं, बल्कि लोकतंत्र का इंजन हैं, जहां देश और राज्यों के भविष्य को लेकर नीतियां बनती हैं। उन्होंने कहा कि जब इन सदनों में स्वस्थ और सार्थक चर्चा होती है, तभी देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता है। गृह मंत्री के अनुसार, अगर सदनों में बहस और विचार-विमर्श ही नहीं होगा तो ये बेजान इमारतों के समान रह जाएंगी।

विपक्ष की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन यह संयमित होना चाहिए। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि अपने संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए सदन की कार्यवाही को दिन-प्रतिदिन बाधित करना एक गलत प्रवृत्ति है, जिस पर देश, जनता और निर्वाचित प्रतिनिधियों को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब चर्चाएं सीमित हो जाती हैं, तो राष्ट्र निर्माण में सदन का योगदान भी प्रभावित होता है।

इस अवसर पर उन्होंने अध्यक्ष (स्पीकर) पद की गरिमा को बनाए रखने की भी अपील की। शाह ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सदन की कार्यवाही नियमों के अनुसार ही चले। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भी सदन की गरिमा से समझौता किया गया है, देश को उसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़े हैं। शाह ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत का लोकतंत्र कितना परिपक्व है, जहां सत्ता परिवर्तन के दौरान कभी रक्त की एक बूंद भी नहीं बही है, जबकि कई अन्य देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं कमजोर हुई हैं

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