अश्विनी वैष्णव ने माइक्रोसॉफ्ट-गूगल को छोड़ ZOHO क्यों चुना, जानिए संस्थापक की अनसुनी कहानी…
Why did Ashwini Vaishnav leave Microsoft and Google and choose Zoho, Know the untold story of the founder...

Breaking Today, Digital Desk : आजकल हर कोई बड़ी-बड़ी कंपनियों के पीछे भागता है, खासकर जब बात टेक्नोलॉजी की आती है। ऐसे में, जब हमारे देश के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जैसा कोई व्यक्ति माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी दुनिया की दिग्गज कंपनियों को छोड़कर ZOHO जैसी देसी कंपनी में शामिल होता है, तो यह बात हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देती है। आखिर ZOHO में ऐसा क्या है, जो इन बड़ी कंपनियों में नहीं?
यह सिर्फ एक नौकरी बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। ZOHO, जिसे श्रीधर वेम्बू ने शुरू किया था, हमेशा से ही कुछ अलग करने में विश्वास रखती है। उन्होंने कभी भी बड़े शहरों की चमक-दमक के पीछे भागने के बजाय, गांवों में प्रतिभा को निखारने पर जोर दिया। यह सुनकर आपको हैरानी होगी कि ZOHO के कई सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स ऐसे हैं, जिनके पास कोई बड़ी डिग्री नहीं है, लेकिन उनके टैलेंट में कोई कमी नहीं।
श्रीधर वेम्बू खुद इस बात पर गर्व करते हैं कि उन्होंने अश्विनी वैष्णव जैसे दूरदर्शी नेता को अपनी टीम में शामिल किया। वे कहते हैं, “यह हमारे लिए एक सम्मान की बात है। अश्विनी वैष्णव का अनुभव और दूरदर्शिता ZOHO को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।” ZOHO सिर्फ सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी नहीं है, यह एक आंदोलन है जो यह साबित करता है कि भारत में भी विश्व स्तरीय इनोवेशन हो सकते हैं।
यह फैसला सिर्फ अश्विनी वैष्णव का व्यक्तिगत फैसला नहीं है, बल्कि यह एक संकेत है कि कैसे हमारे देश के नेता और युवा अब अपनी मिट्टी से जुड़ी कंपनियों पर भरोसा दिखा रहे हैं। यह आत्मनिर्भर भारत का सपना पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।






