
Breaking Today, Digital Desk : जब प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के प्रधानमंत्री को ‘सफेद चंदन की लकड़ी का बुद्ध’ भेंट किया, तो यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि शांति और सद्भाव का प्रतीक था। इसे बनाने वाले कारीगरों ने हर बारीकी पर ध्यान दिया, और चंदन की खुशबू ने इसे और भी खास बना दिया।
और उनकी पत्नी के लिए जो उपहार था, वह तो और भी दिल को छू लेने वाला था – ‘पश्मीना शॉल’। कश्मीर की पश्मीना शॉल अपनी गर्माहट और मुलायमियत के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इसे बनाने में महीनों लगते हैं, और हर धागा किसी कहानी को बयां करता है।
इन उपहारों के जरिए पीएम मोदी ने न सिर्फ दो देशों के बीच दोस्ती बढ़ाई, बल्कि भारत की सदियों पुरानी कला और संस्कृति को भी दुनिया के सामने रखा। ये उपहार इस बात का सबूत हैं कि भारत की कला आज भी कितनी समृद्ध और जीवंत है।
उन्होंने प्रधानमंत्री इशिबा की पत्नी को पेपर माशी से बनी एक पश्मीना शॉल भेंट की। लद्दाख की चंगथांगी बकरी के महीन ऊन से बनी यह शॉल अपने हल्के, मुलायम और गर्म होने के कारण दुनिया भर में सराही जाती है। कश्मीरी कारीगरों द्वारा हाथ से बुनी गई यह शॉल सदियों पुरानी परंपरा को दर्शाती है, जिसे कभी राजघराने संजोते थे। इस शॉल का आधार हाथीदांत का है और इसमें जंग लगे, गुलाबी और लाल रंग के नाज़ुक पुष्प और पैस्ले डिज़ाइन हैं, जो क्लासिक कश्मीरी डिज़ाइन और शिल्प कौशल को दर्शाते हैं।
यह हाथ से रंगे हुए कागज़ की लुगदी से बने एक डिब्बे में आता है, जिस पर फूलों और पक्षियों की आकृतियाँ सजी हैं, जो इसकी सुंदरता और सांस्कृतिक मूल्य को और बढ़ा देती हैं। अधिकारियों ने बताया कि शॉल और डिब्बा मिलकर कश्मीर की कलात्मकता, विरासत और कालातीत शान का प्रतीक हैं




