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तेलुगु अस्मिता पर गठबंधन धर्म भारी, उपराष्ट्रपति चुनाव में चंद्रबाबू नायडू ने NDA का साथ दिया…

Coalition dharma outweighs Telugu identity, Chandrababu Naidu supports NDA in the Vice Presidential election

Breaking Today, Digital Desk : आंध्र प्रदेश की राजनीति के प्रमुख स्तंभ और तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने उपराष्ट्रपति चुनाव के मामले में क्षेत्रीय भावनाओं से ऊपर उठकर अपने गठबंधन धर्म को प्राथमिकता दी है। उन्होंने विपक्ष द्वारा तेलुगु मूल के उम्मीदवार, पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी, को मैदान में उतारने के बावजूद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रत्याशी सी.पी. राधाकृष्णन को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

शुक्रवार को टीडीपी सांसदों के साथ दिल्ली में एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात के बाद चंद्रबाबू नायडू ने अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “हम बहुत खुश हैं कि एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार चुना है। वे सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हैं।” नायडू ने इस बात पर जोर दिया कि टीडीपी चुनाव से पहले ही एनडीए में शामिल हो गई थी और केंद्र तथा आंध्र प्रदेश, दोनों जगहों पर एनडीए की सरकार है, इसलिए उनका समर्थन स्वाभाविक है।

विपक्ष ने पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाकर एक रणनीतिक कदम उठाया था, जिसका उद्देश्य नायडू को तेलुगु अस्मिता के नाम पर असमंजस में डालना था। यह उम्मीद की जा रही थी कि नायडू पर अपने गृह क्षेत्र के उम्मीदवार का समर्थन करने का दबाव होगा। हालांकि, नायडू ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि जब वे पहले से ही एक गठबंधन का हिस्सा हैं, तो उनसे किसी और उम्मीदवार का समर्थन करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया, “तेलुगु देशम पार्टी तेलुगु समुदाय के लिए है। वह एक अलग मुद्दा है। लेकिन हम गठबंधन में हैं। हमारी पार्टी की अपनी नैतिकता और विश्वसनीयता है।”

नायडू ने सी.पी. राधाकृष्णन की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक सज्जन और देशभक्त व्यक्ति बताया और कहा कि वे हमारे देश का गौरव बढ़ाएंगे। उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार उतारने के तर्क पर भी सवाल उठाया, जबकि उनके पास बहुमत नहीं है। चंद्रबाबू नायडू का यह फैसला एनडीए की एकजुटता को प्रदर्शित करता है और यह संदेश देता है कि उनके लिए गठबंधन की प्रतिबद्धता किसी भी क्षेत्रीय दबाव से बढ़कर है।

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