छठ पूजा 2025, सिर्फ़ व्रत नहीं, ये है आस्था का महासंगम…
Chhath Puja 2025, not just a fast, it is a grand gathering of faith...

Breaking Today, Digital Desk : छठ पूजा, सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित एक ऐसा महापर्व है, जो आस्था, प्रकृति प्रेम और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम है। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन अब इसकी छटा देश-विदेश में भी फैल चुकी है। अगर आप भी 2025 में इस पवित्र त्योहार को मनाने या इसके बारे में जानने की सोच रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए है।
छठ पूजा का महत्व: क्यों है यह पर्व इतना ख़ास?
छठ पूजा सिर्फ़ एक त्योहार नहीं, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता और आस्था का प्रतीक है। इस पर्व में उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य देव को जीवन का दाता माना जाता है और छठी मैया (जो कि स्कंदपुराण के अनुसार भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री और बच्चों की रक्षक देवी हैं) को संतान सुख और परिवार की सुख-शांति के लिए पूजा जाता है। यह व्रत संतान प्राप्ति, संतान की लंबी आयु और घर में खुशहाली के लिए रखा जाता है। इस दौरान भक्त कठिन नियमों का पालन करते हैं, जिसमें 36 घंटे का निर्जला व्रत भी शामिल है।
छठ पूजा 2025: कब है और क्या हैं शुभ मुहूर्त?
छठ पूजा का पर्व कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी से सप्तमी तक मनाया जाता है। 2025 में छठ पूजा की संभावित तिथियां और शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
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पहला दिन (नहाय-खाय): [तारीख]
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इस दिन भक्त नदी या तालाब में स्नान कर, नए वस्त्र धारण करते हैं और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। कद्दू-भात और चने की दाल खाने की परंपरा है।
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दूसरा दिन (खरना): [तारीख]
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खरना के दिन व्रतधारी दिन भर निर्जला व्रत रखते हैं और शाम को गुड़ और चावल की खीर, रोटी बनाकर खाते हैं। इसी के साथ 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।
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तीसरा दिन (संध्या अर्घ्य): [तारीख]
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यह छठ पूजा का मुख्य दिन होता है, जब डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
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सूर्यास्त का समय: लगभग [समय] बजे (स्थान के अनुसार भिन्न हो सकता है)
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इस दिन सभी व्रतधारी घाट पर इकट्ठा होते हैं, सूप में फल, ठेकुआ, गन्ना आदि रखकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं।
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चौथा दिन (उषा अर्घ्य/पारण): [तारीख]
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छठ पूजा का समापन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होता है।
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सूर्योदय का समय: लगभग [समय] बजे (स्थान के अनुसार भिन्न हो सकता है)
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सुबह-सुबह सभी घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और इसके बाद व्रत का पारण करते हैं।
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छठ पूजा की rituals: चार दिनों की तपस्या
छठ पूजा के चार दिन पूरी तरह से श्रद्धा और भक्ति में डूबे होते हैं:
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नहाय-खाय: शरीर और मन की शुद्धता का पहला कदम। स्नान के बाद शुद्ध भोजन ग्रहण करना।
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खरना: आत्म-शुद्धि का दिन, जिसमें व्रतधारी एक बार भोजन करते हैं और उसके बाद कठिन निर्जला व्रत का संकल्प लेते हैं।
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संध्या अर्घ्य: डूबते सूर्य को अर्घ्य देना, जो जीवनचक्र, कर्म और पुनर्जन्म के चक्र का प्रतीक है। इस समय संतान और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है।
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उषा अर्घ्य: उगते सूर्य को अर्घ्य देना, नई शुरुआत, आशा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है।
इन चार दिनों में भक्त कठिन तपस्या करते हैं, जिसमें सात्विक भोजन, शुद्धता का विशेष ध्यान और पूरी आस्था के साथ सूर्य देव और छठी मैया की आराधना शामिल है।
छठ पूजा सिर्फ़ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति, प्रकृति के साथ हमारे संबंध और अटूट विश्वास की एक सुंदर गाथा है।






