
Breaking Today, Digital Desk : बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान के आक्रामक तेवरों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए एक नई चुनौती पेश कर दी है। एक ओर जहां चिराग पासवान लगातार अपनी ही सरकार, खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाकर असहज स्थिति पैदा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आगामी विधानसभा चुनावों के लिए सीट-बंटवारे को लेकर भी उनकी महत्वाकांक्षाएं सामने आ रही हैं।इन सब के बीच, भाजपा पर बिहार एनडीए के कुनबे को एकजुट रखने की भारी जिम्मेदारी आ गई है।
हाल के दिनों में चिराग पासवान ने कई मौकों पर बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर अपनी ही सरकार को घेरा है। उन्होंने यहां तक कह दिया है कि उन्हें ऐसी सरकार का समर्थन करने में दुख हो रहा है, जहां अपराध बेलगाम हो गया है उनके इन बयानों से न केवल सहयोगी दल जनता दल (यूनाइटेड) असहज है, बल्कि भाजपा के लिए भी जवाब देना मुश्किल हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषक चिराग के इन बयानों को 2020 के विधानसभा चुनाव की रणनीति के दोहराव के तौर पर देख रहे हैं, जब उन्होंने सीधे तौर पर नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और कई सीटों पर जदयू को नुकसान पहुंचाया था।
मामला सिर्फ बयानों तक ही सीमित नहीं है। चिराग पासवान की पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 30 से 40 सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर दी है, जिससे सीट-बंटवारे का गणित और भी जटिल हो गया है।अपनी ताकत का एहसास कराने और अपनी शर्तों पर राजनीति करने के लिए चिराग ‘बहुजन भीम संवाद’ जैसे अलग कार्यक्रम भी कर रहे हैं, जो एनडीए की सामूहिक रणनीति से अलग एक कदम माना जा रहा है।
इन développements के बीच, भाजपा नेतृत्व सक्रिय हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा चिराग पासवान के साथ बंद कमरे में बैठक कर उन्हें ‘गठबंधन धर्म’ का पाठ पढ़ाने की तैयारी में है। भाजपा का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल रहा है और गठबंधन की एकजुटता पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। भाजपा की कोशिश है कि चुनाव से पहले सभी सहयोगी दलों के बीच के मनमुटाव को दूर कर एक मजबूत और एकजुट एनडीए का संदेश दिया जाए। हालांकि, चिराग पासवान के महत्वाकांक्षी और आक्रामक रुख को देखते हुए यह डगर भाजपा के लिए आसान नहीं लग रही है।






