धनाश्री-युजवेंद्र चहल और वो अनपेड लेबर जिसका हिसाब कोई नहीं रखता…
Dhanashree-Yuzvendra Chahal and the unpaid labour that no one keeps track of...

Breaking Today, Digital Desk : क्या आपने भी पिछले कुछ दिनों में युजवेंद्र चहल और धनाश्री वर्मा के बारे में खबरें सुनीं? वो वाली जिसमें कहा जा रहा था कि उनके बीच सब ठीक नहीं है, शायद तलाक या फिर गुजारा भत्ते (alimony) जैसी बातें चल रही हैं। खैर, बाद में दोनों ने खुद सामने आकर साफ किया कि ऐसा कुछ नहीं है, सब अफवाहें थीं। लेकिन इन अफवाहों ने एक पुरानी बहस को फिर से छेड़ दिया है, जो हमारे समाज में अक्सर दबी रहती है – औरतों के ‘अनपेड लेबर’ की बहस।
सोचिए, किसी भी घर में सुबह से शाम तक कितना काम होता है? खाना बनाना, कपड़े धोना, साफ-सफाई करना, बच्चों की देखभाल करना, घर के बड़े-बुजुर्गों का ध्यान रखना… ये सब कौन करता है? ज़्यादातर घरों में, ये काम औरतें करती हैं। और इसके बदले उन्हें क्या मिलता है? न कोई सैलरी, न कोई छुट्टी, न कोई प्रमोशन। इसे ‘काम’ भी नहीं माना जाता, बस ‘घर का काम’ कहकर टाल दिया जाता है।
यही है वो ‘अनपेड लेबर’ जिसकी हम बात कर रहे हैं। ये एक ऐसा योगदान है जिसकी कोई कीमत नहीं लगाई जाती, लेकिन अगर ये काम होना बंद हो जाए तो पूरा घर ठहर जाए। कल्पना कीजिए, अगर घर की हर महिला अपने इन कामों के लिए पैसे मांगने लगे तो क्या होगा? शायद दुनिया की अर्थव्यवस्था ही हिल जाएगी!
समाज में हमेशा से ये धारणा रही है कि मर्दों का काम बाहर जाकर पैसे कमाना है और औरतों का काम घर संभालना। लेकिन घर संभालना क्या सिर्फ आराम करना है? इसमें उतनी ही मेहनत और लगन लगती है जितनी किसी ऑफिस के काम में। बल्कि कई बार तो उससे भी ज़्यादा, क्योंकि इसमें कोई तय समय नहीं होता, न कोई वीकेंड ऑफ।
इस मामले में धनाश्री और युजवेंद्र का नाम आया, तो बात दूर तक गई। लेकिन ये सिर्फ उनकी कहानी नहीं है। ये हर उस औरत की कहानी है जो घर में बिना किसी आर्थिक पहचान के काम करती है। हमें एक समाज के तौर पर ये समझने की जरूरत है कि घर के काम को भी ‘काम’ का दर्जा मिले। इसका सम्मान हो, इसकी कद्र हो। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक कई ‘धनाश्री’ अपने योगदान के लिए पहचान की मोहताज रहेंगी और कई ‘चहल’ शायद अनजाने में ही इस बात से अंजान रहेंगे कि उनका घर कितनी ‘मुफ्त’ की मेहनत से चल रहा है।
तो अगली बार जब घर में कोई महिला काम कर रही हो, तो सिर्फ ये मत सोचिए कि वो घर का काम कर रही है। सोचिए कि वो एक ऐसा ‘लेबर’ कर रही है जिसकी कीमत कोई नहीं चुका सकता, लेकिन जिसके बिना जीवन की गाड़ी चल नहीं सकती।






