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वज़न घटाने वाली दवाओं का एक और साइड इफ़ेक्ट, ओज़ेम्पिक वल्वा’ पर चर्चा…

Another side effect of weight loss drug Ozempic Vulva discussed

Breaking Today, Digital Desk : ओज़ेम्पिक फेस’ और ‘ओज़ेम्पिक बट’ जैसी शब्दावलियों के बाद, अब एक नया शब्द सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है – ‘ओज़ेम्पिक वल्वा’. यह कोई चिकित्सीय शब्द नहीं है, बल्कि यह उन महिलाओं द्वारा गढ़ा गया एक अनौपचारिक नाम है जो ओज़ेम्पिक (Ozempic) और इसी तरह की अन्य वज़न घटाने वाली GLP-1 दवाओं को लेने के बाद अपने जननांग क्षेत्र में कुछ बदलाव महसूस कर रही हैं.

यह दवाएँ मूल रूप से टाइप 2 डायबिटीज़ के इलाज के लिए बनाई गई थीं, लेकिन वज़न घटाने में इनके प्रभाव के कारण ये काफी लोकप्रिय हो गईं. जहाँ एक तरफ बहुत से लोग इन दवाओं से सकारात्मक परिणाम देख रहे हैं, वहीं कुछ मरीज़ अनपेक्षित और गंभीर दुष्प्रभावों की शिकायत भी कर रहे हैं. इनमें पेट से जुड़ी गंभीर समस्याएँ, किडनी को नुकसान और दृष्टि में समस्याएँ शामिल हैं. इसी कड़ी में अब महिलाओं के जननांगों पर पड़ने वाले प्रभाव भी सामने आ रहे हैं.

क्या हैं ‘ओज़ेम्पिक वल्वा’ के लक्षण?

महिलाएँ जो ‘ओज़ेम्पिक वल्वा’ का अनुभव कर रही हैं, वे कुछ सामान्य लक्षणों की बात कर रही हैं. इनमें योनि के बाहरी हिस्से (लेबिया मेजोरा) का ढीला या कम भरा हुआ दिखना, योनि क्षेत्र में सूखापन, जलन या असुविधा महसूस होना शामिल है. कुछ महिलाएँ पेल्विक हिस्से में कमज़ोरी और सेक्स के दौरान कसाव में कमी भी महसूस कर रही हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि ये बदलाव सीधे तौर पर दवा के कारण नहीं, बल्कि तेज़ी से वज़न घटने के परिणामस्वरूप होते हैं. जब शरीर से तेज़ी से फैट कम होता है, तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है, जिसमें जननांग क्षेत्र भी शामिल है.

विशेषज्ञों की क्या राय है?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ‘ओज़ेम्पिक वल्वा’ के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

तेज़ी से फैट का कम होना: लेबिया मेजोरा में प्राकृतिक रूप से फैटी टिश्यू होते हैं. तेज़ी से वज़न घटने से यह फैट कम हो जाता है, जिससे त्वचा ढीली और झुर्रीदार दिख सकती है.

मांसपेशियों का क्षरण: वज़न घटाने के दौरान फैट के साथ-साथ मांसपेशियों का भी क्षरण हो सकता है. इसका असर पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों पर भी पड़ सकता है, जिससे योनि में ढीलापन महसूस हो सकता है.

हार्मोनल बदलाव: शरीर में फैट की मात्रा कम होने से एस्ट्रोजन का स्तर भी प्रभावित हो सकता है. एस्ट्रोजन योनि में नमी और ऊतकों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है. इसके स्तर में कमी से सूखापन और जलन हो सकती है.

डिहाइड्रेशन: इन दवाओं के कुछ साइड इफ़ेक्ट्स जैसे कि मतली और दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जो योनि के सूखेपन को और बढ़ा सकती है.

क्या हैं समाधान और सावधानियाँ?

विशेषज्ञों का सुझाव है कि जो महिलाएँ इन दवाओं का सेवन कर रही हैं, उन्हें अपने शरीर में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव पर नज़र रखनी चाहिए. हाइड्रेटेड रहना, संतुलित आहार लेना और पेल्विक फ्लोर की एक्सरसाइज़ करना मददगार हो सकता है. योनि में सूखेपन की समस्या के लिए लुब्रिकेंट्स और मॉइश्चराइज़र का इस्तेमाल किया जा सकता है. यदि ये बदलाव बहुत ज़्यादा परेशान कर रहे हैं, तो कुछ कॉस्मेटिक उपचार जैसे कि ‘लेबिया पफिंग’ (dermal fillers) भी उपलब्ध हैं.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी तरह की दवा शुरू करने से पहले और उसके सेवन के दौरान डॉक्टर से सलाह ज़रूर लेनी चाहिए. यदि आप अपने जननांग क्षेत्र में कोई भी असामान्य बदलाव महसूस कर रही हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करने में संकोच न करें.

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