
Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में पाकिस्तान के ननकाना साहिब गुरुद्वारे में कुछ हिंदू श्रद्धालुओं को प्रवेश से रोकने का मामला सामने आया है। इस घटना ने भारत और पाकिस्तान दोनों जगह काफी चर्चा बटोरी है। उन हिंदू भक्तों का कहना है कि उन्हें यह कहकर अंदर जाने से रोका गया कि गुरुद्वारे सिर्फ सिखों के लिए होते हैं। यह बात सुनकर कई लोगों का दिल टूट गया, क्योंकि गुरुद्वारों को हमेशा से ही सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला माना जाता रहा है, जहां कोई भी जाकर मत्था टेक सकता है और लंगर का प्रसाद ग्रहण कर सकता है।
क्या हुआ ननकाना साहिब में?
कुछ भारतीय हिंदू श्रद्धालु पाकिस्तान में अपने धार्मिक स्थलों की यात्रा पर गए थे। इसी दौरान, जब वे ननकाना साहिब गुरुद्वारे में दर्शन के लिए पहुंचे, तो उन्हें कथित तौर पर प्रवेश नहीं दिया गया। श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्हें यह कहकर रोक दिया गया कि यह सिर्फ सिखों का पूजा स्थल है। यह बात उनके लिए काफी चौंकाने वाली थी, क्योंकि भारत में हर गुरुद्वारे में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख – सभी लोग बिना किसी भेदभाव के जाते हैं।
गुरुद्वारों का इतिहास और समावेशी सोच
गुरुद्वारों की नींव ही समानता और समावेशी सोच पर रखी गई है। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी ने ‘एक ओंकार’ का संदेश दिया, जिसका अर्थ है कि ईश्वर एक है और सभी मनुष्य समान हैं। गुरुद्वारों में लंगर की परंपरा भी यही दिखाती है कि बिना किसी जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति के भेदभाव के सभी एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। यह हमेशा से ही सिख धर्म की पहचान रही है।
भारत में, चाहे दिल्ली का बंगला साहिब गुरुद्वारा हो, अमृतसर का स्वर्ण मंदिर, या कोई भी छोटा-बड़ा गुरुद्वारा, आप हमेशा देखेंगे कि वहां हर धर्म के लोग श्रद्धा से आते हैं। वहां न तो कभी किसी से उसका धर्म पूछा जाता है और न ही किसी को प्रवेश से रोका जाता है। ऐसे में, ननकाना साहिब में हुई यह घटना कई लोगों के लिए समझ से परे है।
प्रतिक्रिया और चिंताएं
इस घटना पर सोशल मीडिया पर भी काफी बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और कहा है कि धार्मिक स्थलों पर इस तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील हो जाता है क्योंकि ननकाना साहिब गुरुद्वारा सिख धर्म का एक बहुत ही पवित्र स्थल है, जो गुरु नानक देव जी के जन्मस्थान पर बना है।
भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक यात्राओं को लेकर पहले से ही कुछ प्रोटोकॉल होते हैं। यह देखना होगा कि इस घटना पर पाकिस्तान सरकार या वहां के सिख समुदाय की क्या प्रतिक्रिया आती है। उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी और धार्मिक स्थल सभी के लिए खुले रहेंगे, जैसा कि उनकी मूल भावना है।




