
Breaking Today, Digital Desk : जब बात बिहार की आती है, तो एक शब्द अक्सर सुनने को मिलता है – ‘पलायन’। लोग बेहतर रोज़गार, अच्छी शिक्षा और बेहतर जीवन की तलाश में अपना घर-बार छोड़कर दूसरे राज्यों की ओर रुख करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस पलायन की असली जड़ें कहाँ हैं? हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था को इस गंभीर समस्या के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है, और सीधे तौर पर कांग्रेस और राजद पर हमला बोला है।
प्रधानमंत्री का कहना है कि बिहार में एक ऐसा समय था जब शिक्षा की हालत इतनी बदतर कर दी गई थी कि बच्चों को भविष्य बनाने के लिए अपने ही राज्य से बाहर जाना पड़ा। स्कूल थे, लेकिन पढ़ाई नहीं थी। यूनिवर्सिटी थीं, लेकिन डिग्रियाँ नहीं मिलती थीं या मिलती भी थीं तो उनकी कोई कीमत नहीं थी। ऐसे में, जब शिक्षा ही कमज़ोर हो जाए, तो स्वाभाविक है कि युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए कहीं और ठिकाना ढूंढना पड़ेगा।
कल्पना कीजिए, एक ऐसा राज्य जहाँ के युवा मेधावी तो हैं, लेकिन उन्हें अपने ही घर में सही अवसर नहीं मिल रहे। जहाँ पढ़ाई-लिखाई का स्तर ऐसा हो कि डिग्री लेने के बाद भी नौकरी न मिले। ये कितनी निराशाजनक स्थिति है। पीएम मोदी के इस बयान ने एक बार फिर इस बहस को हवा दे दी है कि क्या वाकई कांग्रेस और राजद के शासनकाल में शिक्षा को जानबूझकर हाशिए पर धकेला गया, ताकि एक विशेष वोट बैंक को साधा जा सके?
यह एक कड़वा सच है कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था दशकों से चुनौतियों का सामना कर रही है। शिक्षकों की कमी, मूलभूत सुविधाओं का अभाव, और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी, ये कुछ ऐसी समस्याएँ हैं जिनसे राज्य लंबे समय से जूझ रहा है। जब शिक्षा की नींव ही हिल जाए, तो उस पर एक मज़बूत भविष्य की इमारत कैसे खड़ी हो सकती है?
पलायन सिर्फ़ आर्थिक मजबूरी नहीं है, यह कहीं न कहीं एक उम्मीद की तलाश भी है। जब अपने ही राज्य में उम्मीदें टूटती हैं, तो लोग मजबूरन दूसरे दरवाज़े खटखटाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान इस ओर इशारा करता है कि अगर बिहार को इस पलायन के दुष्चक्र से बाहर निकालना है, तो सबसे पहले शिक्षा व्यवस्था को मज़बूत करना होगा। बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी, तो वे अपने ही राज्य में रोज़गार के अवसर पैदा कर पाएँगे या कम से कम उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
यह सिर्फ़ राजनीति का मुद्दा नहीं है, बल्कि बिहार के भविष्य का सवाल है। हमें सोचना होगा कि क्या हमने अपने बच्चों को वो शिक्षा दी है, जो उन्हें आज के प्रतिस्पर्धी दौर में आगे बढ़ने के लिए चाहिए? क्या हमने उन्हें अपने राज्य में रुकने की कोई वजह दी है? शायद यही वो सवाल हैं, जिनके जवाब में बिहार के पलायन का असली समाधान छिपा है।






