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नन की गिरफ़्तारी केरल में भाजपा की ईसाईयों को लुभाने की कोशिशों को लगा झटका…

The arrest of the nun is a setback to BJP's efforts to woo Christians in Kerala

Breaking Today, Digital Desk : छत्तीसगढ़ में केरल की दो ननों की गिरफ़्तारी ने केरल की राजनीति में भूचाल ला दिया है, जिससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ईसाई समुदाय को लुभाने के प्रयासों को गंभीर ख़तरा पैदा हो गया है यह घटना ऐसे समय में हुई है जब भाजपा केरल में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले ईसाई वोटों को अपने पाले में करने के लिए एक बड़ी रणनीति पर काम कर रही है.

छत्तीसगढ़ में, जो एक भाजपा शासित राज्य है, ननों को कथित तौर पर जबरन धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में गिरफ़्तार किया गया. हालाँकि, इन आरोपों का केरल में तीखा विरोध हो रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से भाजपा की उस छवि को धक्का लगा है जिसे वह बनाने की कोशिश कर रही थी. पार्टी केरल में ईसाई समुदाय, विशेषकर प्रभावशाली सीरियाई ईसाईयों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए “स्नेह यात्रा” जैसे कार्यक्रम चला रही है.

इस गिरफ़्तारी ने केरल की भाजपा इकाई को एक अजीब स्थिति में डाल दिया है. जहाँ एक ओर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गिरफ़्तारी को “बेटियों की सुरक्षा” का मामला बताकर उसका बचाव किया है, वहीं केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने ननों का समर्थन करते हुए कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि वे किसी भी अवैध गतिविधि में शामिल थीं. चंद्रशेखर ने ननों को हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया है और पार्टी ने उनकी रिहाई के प्रयासों के लिए अपने नेताओं को छत्तीसगढ़ भी भेजा है.

इस मामले ने भाजपा के भीतर भी मतभेद पैदा कर दिए हैं, जहाँ छत्तीसगढ़ और केरल की इकाइयाँ इस मुद्दे पर अलग-अलग रुख अपना रही हैं

विपक्षी दल, कांग्रेस और वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ), इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर हमलावर हैं. उन्होंने इस घटना को भाजपा के “अल्पसंख्यक विरोधी एजेंडे” के सबूत के तौर पर पेश किया है. केरल के सांसदों ने संसद के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया है ईसाई समुदाय के नेताओं और चर्च ने भी इस गिरफ़्तारी की निंदा की है और ननों की तत्काल रिहाई की मांग की है

यह घटना केरल में आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. पार्टी के लिए इस नुकसान की भरपाई करना और ईसाई समुदाय का विश्वास फिर से जीतना एक मुश्किल काम होगा यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा इस संकट से कैसे निपटती है और इसका केरल में उसके राजनीतिक भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है.

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