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शरद पूर्णिमा 2025, क्या आप जानते हैं दूध-पौआ के इस अद्भुत रहस्य को…

Sharad Purnima 2025, do you know this amazing secret of milk and puwa...

Breaking Today, Digital Desk : शरद पूर्णिमा, जिसे ‘कोजागरी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है और 2025 में यह [दिनांक] को पड़ेगी। इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृतमयी मानी जाती हैं।

दूध-पौआ: सिर्फ एक पकवान नहीं, बल्कि अमृत!

शरद पूर्णिमा की रात दूध-पौआ (दूध और पोहे से बना पकवान) बनाने की परंपरा सदियों पुरानी है। लोग इसे खुले आसमान के नीचे रखते हैं ताकि चंद्रमा की किरणें इसमें समाहित हो सकें। माना जाता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं, जो दूध-पौआ को अमृत के समान बना देती हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण:
आयुर्वेद के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित करने का सबसे अच्छा समय होता है। चंद्रमा की किरणें शरीर को शीतलता प्रदान करती हैं और पाचन क्रिया को दुरुस्त करती हैं। दूध-पौआ में मौजूद दूध कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर होता है, जबकि पोहा आसानी से पचने वाला होता है।

स्वास्थ्य लाभ:

  • तनाव कम करता है: चंद्रमा की शीतल किरणें मन को शांत करती हैं और तनाव को कम करने में मदद करती हैं।

  • पाचन सुधारता है: दूध-पौआ हल्का और सुपाच्य होता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है: माना जाता है कि इसमें औषधीय गुण होते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।

  • त्वचा को स्वस्थ रखता है: चंद्रमा की किरणें त्वचा को चमकदार और स्वस्थ बनाने में मदद करती हैं।

शरद पूर्णिमा के अनुष्ठान और पूजा विधि:

शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

  1. स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।

  2. पूजा: घर के मंदिर में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं, नए वस्त्र पहनाएं और फूल, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें।

  3. चंद्रमा की पूजा: रात में चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्घ्य दें। इसके लिए एक तांबे के लोटे में जल, दूध, चावल और चीनी मिलाकर चंद्रमा को अर्पित करें।

  4. खीर और दूध-पौआ: रात में दूध-पौआ और खीर बनाकर उसे चंद्रमा की रोशनी में रखें। आधी रात के बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।

इस रात जागने का महत्व

शरद पूर्णिमा की रात को ‘कोजागरी’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘कौन जाग रहा है?’ मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो व्यक्ति जागकर उनकी पूजा करता है, उसे धन और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

इसलिए, शरद पूर्णिमा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।

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