माइकल क्लार्क को हुआ, क्या हमें भी है ख़तरा, जानें लक्षण और बचाव के उपाय…
Michael Clarke got infected, are we also at risk, Know the symptoms and prevention measures

Breaking Today, Digital Desk : पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर माइकल क्लार्क को त्वचा कैंसर होने की ख़बर ने एक बार फिर इस गंभीर बीमारी की ओर ध्यान खींचा है। ज़्यादा धूप में रहने वाले गोरे लोगों में यह कैंसर अधिक आम है, लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि भारतीयों को इससे कोई ख़तरा नहीं? और आप अपनी त्वचा की स्वयं जाँच कैसे कर सकते हैं?
त्वचा कैंसर क्या है?
त्वचा कैंसर त्वचा की कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि है। यह आमतौर पर सूर्य के पराबैंगनी (UV) विकिरण के संपर्क में आने के कारण होता है। तीन मुख्य प्रकार के त्वचा कैंसर होते हैं: बेसल सेल कार्सिनोोमा, स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और मेलेनोमा। मेलेनोमा सबसे गंभीर प्रकार है।
क्या भारतीयों को त्वचा कैंसर हो सकता है?
हाँ, बिल्कुल। यह एक आम ग़लतफ़हमी है कि सांवली या गहरी रंगत वाली त्वचा वाले लोगों को त्वचा कैंसर नहीं हो सकता। हालाँकि, गोरी त्वचा वाले लोगों की तुलना में यह कम आम है, फिर भी भारतीय आबादी में त्वचा कैंसर के मामले देखे जाते हैं। अक्सर, गहरे रंग की त्वचा में यह कैंसर उन जगहों पर होता है जहाँ धूप कम पहुँचती है, जैसे कि नाखून के नीचे, हथेली या तलवों पर। इसलिए, हर किसी को सतर्क रहना चाहिए।
त्वचा कैंसर के मुख्य कारण:
सूर्य का अधिक संपर्क: UV किरणें मुख्य कारण हैं।
सनबर्न का इतिहास: बचपन में गंभीर सनबर्न से ख़तरा बढ़ जाता है।
परिवार का इतिहास: यदि परिवार में किसी को त्वचा कैंसर हुआ है, तो आपका ख़तरा बढ़ जाता है।
कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली: जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है, उनमें ख़तरा अधिक होता है।
कुछ रसायन: कुछ रसायनों के संपर्क में आने से भी ख़तरा हो सकता है।
त्वचा की स्वयं जाँच कैसे करें (ABCDE नियम)?
अपनी त्वचा की नियमित स्वयं जाँच करना त्वचा कैंसर का शीघ्र पता लगाने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। हर महीने एक बार पूरी त्वचा की जाँच करें, जिसमें ऐसे क्षेत्र भी शामिल हों जहाँ धूप नहीं पहुँचती।
ABCDE नियम मेलेनोमा के चेतावनी संकेतों को याद रखने में मदद करता है:
A – Asymmetry (असमरूपता): एक तिल या धब्बे का एक आधा दूसरे आधे से मेल नहीं खाता।
B – Border (किनारे): तिल या धब्बे के किनारे अनियमित, खुरदुरे या धुंधले हों।
C – Color (रंग): तिल या धब्बे का रंग एक समान न हो और उसमें भूरा, काला, लाल, सफ़ेद या नीला रंग हो।
D – Diameter (व्यास): 6 मिलीमीटर (पेंसिल के इरेज़र के आकार) से बड़ा हो।
E – Evolving (बदलाव): तिल या धब्बा समय के साथ आकार, रंग या बनावट में बदल रहा हो, या उसमें खुजली, दर्द या रक्तस्राव हो रहा हो।
यदि आपको अपनी त्वचा पर कोई नया या बदलता हुआ तिल, धब्बा या घाव दिखाई देता है, तो तुरंत त्वचा विशेषज्ञ से मिलें।
बचाव के उपाय:
धूप से बचें: सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच जब सूरज की किरणें सबसे तेज़ होती हैं, तो धूप में निकलने से बचें।
सनस्क्रीन का प्रयोग करें: घर से बाहर निकलने से पहले कम से कम SPF 30 वाला सनस्क्रीन लगाएँ और हर दो घंटे में इसे दोबारा लगाएँ, खासकर तैरने या पसीना आने के बाद।
सुरक्षात्मक कपड़े पहनें: लंबी बाजू की शर्ट, लंबी पैंट और चौड़ी किनारे वाली टोपी पहनें।
धूप का चश्मा पहनें: जो UV किरणों को रोकता हो।
टैनिंग बेड से बचें: ये भी हानिकारक UV किरणें उत्सर्जित करते हैं।
माइकल क्लार्क का मामला हमें याद दिलाता है कि त्वचा कैंसर एक गंभीर बीमारी है जिससे बचाव और शीघ्र पता लगाना बहुत ज़रूरी है। अपनी त्वचा पर ध्यान दें और किसी भी बदलाव को नज़रअंदाज़ न करें।






