
Breaking Today, Digital Desk : चुनाव का समय हो और नेताओं की नज़रें वोटरों पर न हों, ऐसा हो ही नहीं सकता। इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के सीमांचल और मिथिलांचल में एक ऐसा दांव खेला है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं – और वो है ‘मखाना’!
अमूमन चुनाव में बड़े-बड़े वादे, विकास की बातें या जातिगत समीकरण हावी रहते हैं, लेकिन पीएम मोदी ने इस बार बिहार के इस सुपरफूड को चुनावी चर्चा का केंद्र बना दिया है। ये अपने आप में एक अनोखा तरीका है। मखाना, जो सिर्फ खाने की चीज़ नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के किसानों और आम लोगों की रोज़ी-रोटी से जुड़ा है, उसे उठाकर मोदी ने एक साथ कई निशाने साधे हैं।
ये सिर्फ एक चुनावी चाल नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और किसानों की भावनाओं से जुड़ने का एक सीधा प्रयास भी है। मखाना किसानों को अक्सर सही दाम न मिलने या बाज़ार तक पहुँचने में दिक्कत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जब देश का प्रधानमंत्री खुद उनके इस उत्पाद की बात करता है, तो इसका सीधा असर लोगों के मन पर होता है।
क्या यह ‘मखाना मास्टरस्ट्रोक’ सीमांचल और मिथिला के चुनावी समीकरण बदल पाएगा? क्या किसान और आम लोग इसे सिर्फ चुनावी जुमला मानेंगे या उन्हें इसमें अपने लिए उम्मीद की किरण दिखेगी? ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना ज़रूर है कि मखाना अब सिर्फ तालाबों में उगने वाला खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति का एक अहम मुद्दा बन गया है।






