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कमबैक कैसे करना चाहिए फिल्म इंडस्ट्री को सिखा दिया इस डायरेक्टर ने पहले बेचते थे बड़ापाव

अगर इस समय आपसे कोई पुछ दे की फिल्म इंडस्ट्री में क्या चल रहा है तो आपके मुंह से पहला शब्द निकलेगा “छावा  ” जिसकी धुआंधार कामयाबी ने विक्की कौशल के  स्टारडम को बढ़ा दिया है ।  लेकिन फिल्म के असली हीरो यानी ‘छावा’ के डायरेक्टर लक्ष्मण उतेकर की बात नही कि जाये तो 500 करोड़ कमाने वाली इस फिल्म के बारे में आपकी जानकारी अधुरी रह जायेगी ।  फिल्म 14 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। तमाम विवादों के बावजूद इस फिल्म ने बड़े पर्दे पर दस्तक देते ही तबाही मचा दी। फिल्म ने मात्र तीन दिनों में 100 करोड़ का कलेक्शन पार कर लिया था। छत्रपति संभाजी महाराज के गौरव और साहस को बड़े पर्दे पर देखना दर्शकों को काफी पसंद आया। वहीं इसका क्लाइमेक्स सीन इतना इमोशनल था कि दर्शक रो पड़े। लक्ष्मण की फिल्मों के फ्रेम देखकर ये लग सकता है कि उन्होंने किसी बड़े सिनेमा इंस्टिट्यूट से सिनेमा पढ़ाई की होगी. लेकिन लक्ष्मण ने असल में सिनेमा की नही बल्कि जिंदगी की वो कठिन पढ़ाई की जिसे पढ़ पाना कोई आम बात नही है। चार साल के लक्ष्मण अपना गांव छोड़कर अपने चाचा के साथ मुंबई आ गये , पढ़ाई मे मन नही लगता था इसलिए छोटा मोटा काम करना पड़ता था । उन्होंने सबसे पहला काम मुंबई के शिवाजी पार्क में वड़ा पाव बेचने का किया तो बीएमसी वाले उनका ठेला ही उठा ले गये । फिर एक दिन लक्ष्मण ने अखबार में एक ऐड देखा, जिसने उनकी तकदीर बदल दी. ऐड ये था कि मुंबई के एक स्टूडियो को स्वीपर यानी सफाई करने वाले की जरूरत थी लक्ष्मण पहुंच गए और नौकरी शुरू कर दी. उन्हें स्टूडियो की लाइफ और खाना पसंद आने लगा था. एक बार स्टूडियो में कोई कैमरा अटेंडेंट नहीं था और चीफ कैमरामैन  नाराज होने लगे तो तो स्टूडियो मालिक ने लक्ष्मण की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘अरे ये बैठा है, इसे ले जा.’ इस तरह वो कैमरा अटेंडेंट बन गए। धीरे धीरे लक्ष्मण इंडस्ट्री को समझने लगे असफलता भी हाथ लगी लेकिन वो कभी हार नही माने इनकी सिनेमेटोग्राफी की चर्चा होने लगी । अपनी पहली हिंदी फिल्म ‘लुका छुप्पी’ में कार्तिक आर्यन और कृति सेनन को डायरेक्ट किया. ये रोमांटिक कॉमेडी फिल्म जनता को पसंद आई और लक्ष्मण की पहली फिल्म 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई की लक्ष्मण की फिल्म ‘टपाल’ से लेकर ‘छावा’ तक लक्ष्मण की फिल्मों का रिकॉर्ड जबरदस्त रहा है. उनकी फिल्में तारीफ बटोरने के साथ-साथ बॉक्स ऑफिस पर भी कामयाब रही हैं. और ‘छावा’ ने तो जो धमाल मचाया है उसको देखने के बाद तो यही लगता है कि लक्ष्मण अब किसी परिचय के मोहताज नही है , और मेहनत करते रहना चाहिए क्योकि सफलता भी मेहनत करने वालो पर फिदा हो जाती है ।

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