
Breaking Today, Digital Desk : आज पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व (फेड) पर टिकी हैं. फेड आज अपनी दो दिवसीय बैठक के बाद ब्याज दरों पर फैसला सुनाएगा. यह फैसला ऐसे समय में आ रहा है जब अर्थव्यवस्था और राजनीति के बीच एक जबरदस्त खींचतान चल रही है. एक तरफ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ब्याज दरें घटाने का दबाव बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ महंगाई के आंकड़े फेड को सतर्क रहने पर मजबूर कर रहे हैं.
क्या है पूरा मामला?
आसान शब्दों में समझें तो फेडरल रिजर्व का काम अमेरिका की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखना है. इसके लिए उसके पास सबसे बड़ा हथियार ब्याज दरें हैं. जब महंगाई बढ़ती है तो फेड ब्याज दरें बढ़ा देता है ताकि बाजार में पैसा कम हो और महंगाई काबू में आए. वहीं, जब अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ती है तो दरें घटाई जाती हैं ताकि लोग ज्यादा खर्च करें और आर्थिक पहिया घूमता रहे.
इस समय अमेरिका में ब्याज दर 4.25% से 4.50% के बीच है. फेड ने पिछले कुछ समय से इन दरों को स्थिर रखा है. इसका मकसद महंगाई को और बढ़ने से रोकना है, जो अभी भी फेड के 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है जून में महंगाई दर 2.7% दर्ज की गई थी, जिसने फेड की चिंताएं बढ़ा दी हैं.
राजनीतिक दबाव क्यों?
अर्थव्यवस्था के इन समीकरणों के बीच राजनीति भी अहम भूमिका निभा रही है. पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि ऊंची ब्याज दरों से अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो रही है. उनका फेड पर आरोप है कि वह जानबूझकर दरें ऊंची रखकर अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है ट्रंप चाहते हैं कि फेड ब्याज दरों में भारी कटौती करे ताकि आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके. उन्होंने फेड के चेयरमैन जेरोम पॉवेल की सार्वजनिक रूप से आलोचना भी की है.
फेड की दुविधा
फेडरल रिजर्व इस समय एक मुश्किल राह पर खड़ा है. अगर वह राजनीतिक दबाव में आकर ब्याज दरें घटाता है, तो उसकी स्वायत्तता पर सवाल उठेंगे और यह जोखिम भी रहेगा कि महंगाई फिर से बेकाबू हो सकती है वहीं, अगर वह दरें स्थिर रखता है, तो उस पर आर्थिक विकास को धीमा करने के आरोप लग सकते हैं.
फेड के अंदर भी इस बात को लेकर पूरी तरह से एक राय नहीं है. कुछ सदस्य मानते हैं कि दरें घटाने का समय आ गया है, जबकि ज्यादातर अधिकारी अभी ‘देखो और इंतजार करो’ की नीति पर चलना चाहते हैं.
आगे क्या होगा?
अधिकांश विशेषज्ञ और बाजार के जानकार यही मान रहे हैं कि फेड इस बार भी ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखेगा. हालांकि, फैसले से ज्यादा महत्वपूर्ण चेयरमैन जेरोम पॉवेल की प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. उनके दिए गए संकेतों से ही यह साफ होगा कि भविष्य में फेड का अगला कदम क्या होगा. बाजार को उम्मीद है कि सितंबर तक ब्याज दरों में कटौती का रास्ता साफ हो सकता है, लेकिन यह आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा.




