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बीएमसी चुनाव, क्या ठाकरे का ‘साथ’ भी बीजेपी की राह नहीं रोक पाएगा…

BMC elections, will Thackeray's 'support' also not be able to stop BJP...

Breaking Today, Digital Desk : मुंबई के निकाय चुनाव (BMC Elections) अब बस कुछ ही दूर हैं, और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। ऐसे में भाजपा (BJP) का एक अंदरूनी आकलन सामने आया है, जिसने कई समीकरणों को बदलने का संकेत दिया है। इस आकलन के मुताबिक, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति (Mahayuti) को स्पष्ट बढ़त मिल रही है। खास बात यह है कि इस आकलन में दावा किया गया है कि अगर उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) गुट और प्रकाश अंबेडकर (Prakash Ambedkar) की वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) भी साथ आ जाएं, तब भी मतदाताओं पर इसका खास असर नहीं पड़ेगा।

क्या कहते हैं भाजपा के सूत्र?

भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने अपने स्तर पर एक विस्तृत सर्वेक्षण करवाया है। इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष बता रहे हैं कि महायुति, जिसमें भाजपा, एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) का शिवसेना गुट और अजित पवार (Ajit Pawar) का एनसीपी गुट शामिल है, बीएमसी में बहुमत के आंकड़े को आसानी से पार कर लेगी। सूत्रों का कहना है कि यह आकलन जमीनी स्तर पर मतदाताओं के रुझान और विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में कराए गए सर्वे पर आधारित है।

उद्धव-प्रकाश के संभावित गठबंधन पर असर?

हाल ही में उद्धव ठाकरे और प्रकाश अंबेडकर के बीच बढ़ती नजदीकियां राजनीतिक पंडितों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं कि ये दोनों दल बीएमसी चुनावों में गठबंधन कर सकते हैं। हालांकि, भाजपा के आंतरिक आकलन में इस संभावित गठबंधन को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही ये दोनों दल हाथ मिला लें, फिर भी मतदाताओं का झुकाव महायुति की ओर ही रहेगा।

मतदाताओं के मुद्दे क्या हैं?

भाजपा के आकलन में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि मुंबई के मतदाता अब विकास और पारदर्शिता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं। पिछली बीएमसी में हुए कथित भ्रष्टाचार और धीमी गति से चल रहे विकास कार्यों से लोग नाखुश हैं। महायुति इन्हीं मुद्दों को लेकर मतदाताओं के बीच जा रही है और उन्हें इसका फायदा मिलता दिख रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय:

हालांकि, कई राजनीतिक विश्लेषक इस आकलन को भाजपा की रणनीति का हिस्सा भी मान रहे हैं, ताकि विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके। उनका मानना है कि बीएमसी चुनाव हमेशा से अप्रत्याशित रहे हैं और अंतिम समय में समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि, इसमें कोई दो राय नहीं है कि भाजपा अपनी जीत को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रही है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये राजनीतिक आकलन कितने सही साबित होते हैं और मुंबई की जनता आखिर किस दल को अपना आशीर्वाद देती है।

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