उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी शहर की भीड़भाड़ और यातायात अव्यवस्था को देखते हुए एक अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में वाराणसी के दालमंडी मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। यह निर्णय वाराणसी में बढ़ते पर्यटन, दर्शनार्थियों की संख्या और यातायात की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। वाराणसी के मैदागिन, गोदौलिया, नई सड़क और चौक थाना क्षेत्र में आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। भीड़ बढ़ने से आसपास की गलियों में भी यातायात बाधित होता है, जिससे आम जनता के साथ-साथ पर्यटकों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जनसुविधा, भीड़ नियंत्रण और सुलभ यातायात व्यवस्था के उद्देश्य से दालमंडी मार्ग का चौड़ीकरण किया जाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। योजना की पुनरीक्षित (आगणन) ₹215.88 करोड़ निर्धारित की गई है। परियोजना में सिविल कार्य, यूटिलिटी शिफ्टिंग, प्रभावित भूमि का अधिग्रहण एवं भवनों का प्रतिकर सम्मिलित है। चूंकि मार्ग निर्माण के लिए बाधक भवनों के विस्थापन और मुआवजा के बिना कार्य संभव नहीं है, इसलिए पुनरीक्षित आगणन के तहत आवश्यक व्यय को सम्मिलित किया गया है। वैकल्पिक मार्ग की अनिवार्यता को देखते हुए संबंधित राजस्व ग्रामों—शहरखास एवं काशीपुरा में नगर निगम द्वारा प्रस्तुत स्वामित्व के आधार पर मुआवजे की प्रक्रिया आपसी समझौते के अंतर्गत की जाएगी। यह संपूर्ण प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम-2013 के अंतर्गत निष्पादित की जाएगी। इस परियोजना के क्रियान्वयन से न केवल वाराणसी की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं को भी बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही यह विकास कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित काशी’ के संकल्प और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुशासन नीति का जीवंत उदाहरण है।
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