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भारत-पाक क्रिकेट ओलंपिक से आउट, अमेरिका का बड़ा नुकसान…

India-Pakistan cricket out of Olympics, big loss for America...

Breaking Today, Digital Desk : क्रिकेट और ओलंपिक का रिश्ता काफी पुराना है, लेकिन मॉडर्न ओलंपिक में इसे फिर से शामिल करने की चर्चा पिछले कुछ समय से खूब चल रही है. 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल करने की बात तो पक्की हो गई है, लेकिन क्या हमें वहां भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा? शायद नहीं, और ये सिर्फ फैंस के लिए ही नहीं, बल्कि अमेरिका जैसे देशों के लिए भी एक बड़ा मौका गंवाने जैसा होगा.

क्यों नहीं दिख सकती भारत-पाकिस्तान rivalry?

असल में, ओलंपिक में क्रिकेट को जिस फॉर्मेट में खेला जाएगा, वो है T20. और T20 फॉर्मेट में टीमों का चयन उनकी ICC रैंकिंग के आधार पर होगा. समस्या ये है कि ओलंपिक में हर देश से सिर्फ एक टीम ही हिस्सा ले सकती है. भारत और पाकिस्तान, दोनों ही क्रिकेट की दुनिया की दिग्गज टीमें हैं, और इनकी रैंकिंग भी काफी ऊपर रहती है.

अगर हम 2028 तक की रैंकिंग्स को देखें, तो भारत और पाकिस्तान का एक साथ ओलंपिक में खेलना मुश्किल हो सकता है. हो सकता है कि सिर्फ टॉप 6 या टॉप 8 टीमें ही क्वालीफाई करें, और अगर ये दोनों टीमें अलग-अलग ग्रुप में भी हों, तो भी इनके बीच मुकाबला होने की संभावना कम ही रहेगी, खासकर अगर दोनों टीमें अच्छा प्रदर्शन न करें.

दूसरा कारण है, इन दोनों देशों के बीच मौजूदा राजनैतिक तनाव. भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज काफी समय से नहीं हुई है. वे सिर्फ ICC टूर्नामेंट्स में ही एक-दूसरे का सामना करते हैं. ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर भी इनके बीच मुकाबले को लेकर दोनों देशों की सरकारें शायद ही राजी हों. ऐसे में, भले ही क्रिकेट ओलंपिक का हिस्सा बन जाए, लेकिन भारत-पाकिस्तान rivalry का रोमांच शायद हमें देखने को न मिले.

अमेरिका के लिए क्यों है ये एक चूक?

अमेरिका जैसा देश, जहां क्रिकेट अभी भी उतना लोकप्रिय नहीं है जितना फुटबॉल या बास्केटबॉल, वहां के लिए भारत-पाकिस्तान का मैच एक गेम चेंजर साबित हो सकता था.

  1. दर्शकों को खींचने का मौका: भारत और पाकिस्तान के बीच का मैच दुनिया भर में करोड़ों लोग देखते हैं. अगर ये मैच अमेरिका में होता, तो वहां भी लाखों लोग इसे देखने आते, जिससे ओलंपिक की लोकप्रियता बढ़ती और अमेरिका में क्रिकेट को बढ़ावा मिलता.

  2. आर्थिक लाभ: ऐसे बड़े मुकाबले से टिकट बिक्री, विज्ञापन और पर्यटन में काफी इजाफा होता. अमेरिका के लिए ये एक बड़ा आर्थिक अवसर होता, खासकर जब वे क्रिकेट को अपने देश में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं.

  3. क्रिकेट को लोकप्रिय बनाना: अमेरिका में भारतीय और पाकिस्तानी मूल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं, जो क्रिकेट के दीवाने हैं. उनके लिए अपनी टीमों को ओलंपिक में एक-दूसरे से भिड़ते देखना एक सपना होता, और इससे नए अमेरिकी दर्शकों को भी क्रिकेट से जुड़ने का मौका मिलता.

क्या है आगे की राह?

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) को इस मुद्दे पर गहराई से विचार करना होगा. अगर वे चाहते हैं कि क्रिकेट ओलंपिक में अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचे और वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय हो, तो उन्हें इस बात का समाधान ढूंढना होगा कि कैसे भारत-पाकिस्तान जैसे बड़े मुकाबले ओलंपिक जैसे मंच पर संभव हो सकें.

हालांकि अभी तक ऐसा लग नहीं रहा है कि 2028 में हमें ये रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा, लेकिन उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी राह निकलेगी जिससे क्रिकेट के फैंस को ओलंपिक में भी इस महान rivalry का लुत्फ उठाने का मौका मिले.

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