
Breaking Today, Digital Desk : चिलचिलाती गर्मी के बाद मानसून की बौछारें राहत तो लाती हैं, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह मौसम मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बारिश के साथ आने वाले उदासी, चिड़चिड़ापन और चिंता के इस एहसास को मानसून एंग्जायटी” या “मानसिक अवसाद” कहा जाता है। अगर आपको भी इस मौसम में ऐसा महसूस होता है, तो आप अकेले नहीं हैं।आइए विशेषज्ञों से जानते हैं कि इसके पीछे क्या कारण हैं और इससे कैसे निपटा जा सकता है।
क्यों होता है मानसून में मानसिक अवसाद?
कई अध्ययनों और विशेषज्ञ की राय के अनुसार, मानसून के दौरान मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ने के कई कारण हो सकते हैं:
सूरज की रोशनी की कमी: यह सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। सूरज की रोशनी की कमी से शरीर में सेरोटोनिन (फील-गुड हार्मोन) का स्तर गिर सकता है और मेलाटोनिन (नींद को नियंत्रित करने वाला हार्मोन) का स्तर बढ़ सकता है, जिससे मूड में बदलाव, उदासी और सुस्ती महसूस होती है।
बिगड़ती दिनचर्या: लगातार बारिश के कारण बाहरी गतिविधियाँ, व्यायाम और सामाजिक मेलजोल कम हो जाता है। इस वजह से अकेलापन और उदासी की भावना बढ़ सकती है।
सीमित शारीरिक गतिविधि: मौसम के कारण घर में बंद रहने से शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं, जिससे शरीर में एंडोर्फिन (मूड अच्छा करने वाला रसायन) का स्राव कम हो जाता है।
सीज़नल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD): मानसून ब्लूज़ को सीज़नल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) का एक रूप माना जाता है।[1][7] यह एक प्रकार का अवसाद है जो मौसम में बदलाव के साथ होता है। इसके सामान्य लक्षणों में उदासी, थकान, ऊर्जा की कमी, चिड़चिड़ापन और भूख में बदलाव शामिल हैं।
उच्च आर्द्रता और बैरोमेट्रिक दबाव: हवा में नमी और वायुमंडलीय दबाव में बदलाव भी कुछ लोगों में बेचैनी और चिड़चिड़ापन पैदा कर सकते हैं।
विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए बचाव के तरीके
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानसून की चिंता से निपटने के लिए कई असरदार तरीके सुझाते हैं:
प्राकृतिक रोशनी का लाभ उठाएं: जब भी बारिश रुके और धूप निकले, तो कुछ समय बाहर बिताएं। घर के पर्दे खुले रखें ताकि अधिक से अधिक प्राकृतिक रोशनी अंदर आ सके।
नियमित व्यायाम करें: घर के अंदर भी योग, डांस या अन्य इनडोर वर्कआउट करके सक्रिय रहें। नियमित व्यायाम से एंडोर्फिन का स्तर बढ़ता है, जो मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है।
संतुलित आहार लें: स्वस्थ और संतुलित भोजन करें। अपनी डाइट में ताजे फल और सब्जियों को शामिल करें और जंक फूड से बचें।
दिनचर्या बनाए रखें: एक नियमित दिनचर्या का पालन करें सोने और जागने का समय निश्चित करें, इससे आपके शरीर की जैविक घड़ी संतुलित रहेगी।
सामाजिक रूप से जुड़ें: दोस्तों और परिवार के साथ जुड़े रहें, चाहे वो फोन पर हो या वीडियो कॉल के जरिए। अकेलापन अवसाद के लक्षणों को बढ़ा सकता है।
रचनात्मक कार्यों में मन लगाएं: अपने शौक पूरे करें जैसे कि पढ़ना, संगीत सुनना, चित्रकारी करना या कुछ नया बनाना।
आराम और नींद को प्राथमिकता दें: शरीर और दिमाग को तरोताज़ा रखने के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत ज़रूरी है।
विशेषज्ञ की सलाह लें: यदि उदासी और चिंता के लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहते हैं या आपके दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहे हैं, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करने में संकोच न करें।
मानसून के दौरान अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य का। इन छोटी-छोटी बातों को अपनाकर आप इस खूबसूरत मौसम का पूरा आनंद उठा सकते हैं।






