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तेल का खेल, क्या रूसी तेल खरीद ने यूक्रेन युद्ध को दो साल तक खींचा…

Oil game, did Russian oil purchases drag the Ukraine war on for two years...

Breaking Today, Digital Desk : पूर्व अमेरिकी राजदूत का दावा है कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों ने रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा दिया।

यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को दो साल से अधिक हो गए हैं। युद्ध लंबा खिंचता जा रहा है, और अब नाटो में अमेरिका के पूर्व राजदूत, कर्ट वॉकर के एक बयान ने इस संघर्ष के वित्तपोषण पर नई बहस छेड़ दी है।

वॉकर का दावा है कि भारत, चीन, ब्राजील और यहां तक कि कुछ हद तक संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों द्वारा रूसी तेल की खरीद ने अप्रत्यक्ष रूप से रूस को युद्ध जारी रखने के लिए धन उपलब्ध कराया है। उन्होंने तर्क दिया कि इन देशों ने रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदा, जिससे रूस को पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद राजस्व मिलता रहा।

यह आरोप कई सवाल खड़े करता है। क्या वाकई इन देशों की तेल खरीद ने युद्ध को बढ़ावा दिया है? क्या रूस पर लगाए गए प्रतिबंध उतने प्रभावी नहीं रहे जितने होने चाहिए थे? और सबसे महत्वपूर्ण, इन देशों के अपने हित क्या थे, और क्या वे इस बात से अनभिज्ञ थे कि उनके कार्यों का क्या परिणाम हो सकता है?

भारत और चीन, जो दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में से हैं, ने रूस से रियायती कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा खरीदा है। दोनों देशों ने तर्क दिया है कि वे अपने नागरिकों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं और किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं। ब्राजील ने भी इसी तरह के तर्क दिए हैं। अमेरिका के मामले में, वॉकर का दावा है कि भले ही अमेरिका ने रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन उसने अप्रत्यक्ष रूप से रूसी तेल खरीदने वाले देशों से परिष्कृत उत्पादों को खरीदा।

वॉकर के बयान ने इस जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य को और उलझा दिया है। यह स्पष्ट है कि यूक्रेन युद्ध के आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव दूरगामी हैं, और इसमें कई देश और उनके हित शामिल हैं।

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