प्रेमानंद महाराज से मिलने, साइकिल पर वृंदावन पहुँचा एक नन्हा भक्त…
A small devotee reached Vrindavan on bicycle to meet Premanand Maharaj

Breaking Today, Digital Desk : कभी-कभी बच्चों को बड़ों की बातें इतनी चुभ जाती हैं कि वे कुछ ऐसा कर बैठते हैं, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। ऐसा ही कुछ हुआ सातवीं क्लास के एक बच्चे के साथ। माँ की डाँट उसे इतनी बुरी लगी कि उसने घर छोड़ने का फैसला कर लिया। लेकिन कहाँ जाए? उसने सोचा, क्यों न वृंदावन चला जाए, प्रेमानंद महाराज से मिलने!
यह कोई छोटी बात नहीं थी। सातवीं कक्षा का बच्चा, अपनी साइकिल उठाई और निकल पड़ा वृंदावन के सफर पर। सोचिए, उस छोटे से मन में कितनी बातें चल रही होंगी। गुस्सा होगा, उदासी होगी, और शायद एक उम्मीद भी कि महाराज से मिलकर उसे मन की शांति मिलेगी।
उसकी यह यात्रा सिर्फ साइकिल से तय की गई दूरी नहीं थी, बल्कि यह उसके बाल-मन की एक गहरीT खोज थी। यह दिखाता है कि कैसे कभी-कभी बच्चे भी अपने इमोशन्स को संभालने के लिए बड़ों से ज्यादा मजबूत फैसले ले लेते हैं। प्रेमानंद महाराज से मिलने की उसकी इच्छा इतनी प्रबल थी कि उसने रास्ते की मुश्किलों की परवाह भी नहीं की। आखिर क्या हुआ जब वो वृंदावन पहुंचा और महाराज से मिला? यह तो एक ऐसी कहानी है जो हमें सोचने पर मजबूर करती है कि बच्चों की भावनाओं को समझना कितना ज़रूरी है।






