पितरों को खुश करने का सबसे आसान तरीका, तर्पण विधि, जानिए सही समय और मंत्र…
The easiest way to please ancestors is Tarpan Vidhi, know the right time and mantra...

Breaking Today, Digital Desk : हमारे हिंदू धर्म में पूर्वजों का बहुत सम्मान किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि हमारे पूर्वज, जिन्हें हम पितर कहते हैं, हमेशा हमारे साथ होते हैं और हमें आशीर्वाद देते हैं। जब पितृ पक्ष आता है, तो यह समय ख़ास तौर पर उन्हें याद करने और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का होता है। इस दौरान पितरों को प्रसन्न करने का एक बहुत ही सरल और महत्वपूर्ण तरीका है – तर्पण विधि।
क्या आप जानते हैं कि तर्पण क्या है और इसे क्यों किया जाता है?
तर्पण एक ऐसी धार्मिक क्रिया है जिसमें हम अपने दिवंगत पूर्वजों, देवताओं और ऋषियों को जल अर्पित करते हैं। यह एक तरह से उनके प्रति अपना आभार व्यक्त करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने का तरीका है। कहते हैं कि सही विधि से किया गया तर्पण पितरों को तृप्त करता है और उनके आशीर्वाद से हमारे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
तर्पण करने का सही समय क्या है?
तर्पण मुख्य रूप से पितृ पक्ष के दौरान किया जाता है। पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। इन 15-16 दिनों में आप अपने पितरों की तिथि के अनुसार या किसी भी दिन तर्पण कर सकते हैं। इसके अलावा, रोज़ाना सूर्योदय के समय भी तर्पण करना शुभ माना जाता है। स्नान करने के बाद, साफ़ कपड़े पहनकर ही तर्पण करना चाहिए।
तर्पण कैसे करें? जानिए पूरी विधि:
तर्पण करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है, बस आपको सही तरीका पता होना चाहिए।
तैयारी: सबसे पहले सुबह स्नान करें और साफ़ वस्त्र पहनें। एक तांबे का लोटा या कोई अन्य पात्र लें। उसमें शुद्ध जल भरें और उसमें थोड़े काले तिल, थोड़े जौ और सफ़ेद फूल मिला लें।
सही दिशा: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें या खड़े हों। यह दिशा पितरों की मानी जाती है।
संकल्प: अपने हाथ में जल लेकर संकल्प करें कि आप अमुक गोत्र के अपने पितरों के लिए तर्पण कर रहे हैं।
जल अर्पण: अब अंजुली में थोड़ा जल लें और अपने अंगूठे और तर्जनी (अंगूठे के पास वाली उंगली) के बीच से उस जल को ज़मीन पर या किसी पात्र में गिराएं। यह क्रिया आपको 3, 7, 11 या 21 बार करनी होती है, जितनी आप कर सकें।
मंत्र जाप: जल अर्पित करते समय ‘ॐ पितृभ्यः नमः’ या ‘ॐ सर्व पितृ देवाय नमः’ मंत्र का जाप करें। आप अपने पितरों का नाम लेकर भी ‘अमुक गोत्रस्य अमुक शर्मा प्रेतस्य’ या ‘अमुक गोत्रस्य अमुकी देवी प्रेतायै’ कहकर जल अर्पित कर सकते हैं।
ब्राह्मण भोजन/दान: तर्पण के बाद किसी ब्राह्मण को भोजन कराना या उन्हें दान देना बहुत शुभ माना जाता है। अगर यह संभव न हो तो किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराएं या सामर्थ्य अनुसार दान करें।
तर्पण से क्या लाभ मिलते हैं?
मान्यता है कि तर्पण करने से पितृ दोष शांत होता है। जिन लोगों के जीवन में लगातार परेशानियां आती हैं, उन्हें पितरों को याद करके तर्पण ज़रूर करना चाहिए। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे प्रसन्न होकर हमें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। परिवार में खुशहाली आती है और संतान संबंधी बाधाएं भी दूर होती हैं। यह हमें अपने पूर्वजों से जुड़ाव महसूस कराता है और हमें अपनी जड़ों को समझने में मदद करता है।
इस पितृ पक्ष, अपने पूर्वजों को याद करें और इस सरल तर्पण विधि से उन्हें अपनी श्रद्धा अर्पित करें। यक़ीन मानिए, उनका आशीर्वाद आपके जीवन को नई दिशा देगा।






