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मुँह की सेहत और स्ट्रोक के खतरे के बीच का अनदेखा संबंध…

The overlooked link between oral health and stroke risk...

Breaking Today, Digital Desk : क्या आपने कभी सोचा है कि आपके मुँह की सेहत का संबंध आपके दिमाग से भी हो सकता है? अक्सर हम दाँतों और मसूड़ों की समस्याओं को बस मुँह तक ही सीमित समझते हैं, लेकिन सच तो यह है कि यह आपके पूरे शरीर, खासकर आपके दिल और दिमाग पर गहरा असर डाल सकती हैं। हाल ही में हुए कई शोधों ने इस बात की पुष्टि की है कि खराब मौखिक स्वास्थ्य (oral health) और स्ट्रोक (stroke) के जोखिम के बीच एक चिंताजनक संबंध हो सकता है।

स्ट्रोक एक ऐसी गंभीर स्थिति है जिसमें दिमाग के किसी हिस्से में खून का प्रवाह बाधित हो जाता है, जिससे दिमाग की कोशिकाएँ मरने लगती हैं। यह जानलेवा भी हो सकता है या फिर व्यक्ति को आजीवन विकलांग बना सकता है। हम सभी जानते हैं कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान और मोटापा जैसे कारक स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाते हैं। लेकिन अब वैज्ञानिकों की नज़र एक नए संभावित कारक पर है – और वो है आपके मुँह में पनपने वाले बैक्टीरिया और संक्रमण।

कैसे जुड़ा है ये रिश्ता?

हमारे मुँह में अरबों बैक्टीरिया रहते हैं, जिनमें से कुछ अच्छे होते हैं और कुछ खराब। जब हम अपने दाँतों की ठीक से सफाई नहीं करते हैं, तो ये हानिकारक बैक्टीरिया पनपने लगते हैं और मसूड़ों में सूजन और संक्रमण (जैसे पायरिया या मसूड़ों की बीमारी) पैदा कर सकते हैं। ये बैक्टीरिया और उनसे निकलने वाले विषैले पदार्थ सिर्फ मुँह तक ही नहीं रहते, बल्कि खून के ज़रिए पूरे शरीर में फैल सकते हैं।

जब ये बैक्टीरिया रक्तप्रवाह में शामिल हो जाते हैं, तो वे धमनियों (arteries) की दीवारों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इससे धमनियों में प्लाक (plaque) बनने की प्रक्रिया तेज़ हो सकती है, जो आगे चलकर रक्त के थक्के (blood clots) बनने का कारण बन सकते हैं। ये रक्त के थक्के यदि दिमाग तक पहुँच जाएँ तो स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं।

इसके अलावा, मसूड़ों की सूजन से शरीर में एक प्रकार की लगातार सूजन (chronic inflammation) बनी रहती है। यह सूजन भी धमनियों को नुकसान पहुँचा सकती है और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकती है। कुछ अध्ययनों ने यह भी दिखाया है कि मुँह में पाए जाने वाले कुछ खास बैक्टीरिया सीधे दिमाग तक पहुँच कर वहाँ भी सूजन और क्षति पहुँचा सकते हैं।

तो क्या करें?

यह सब सुनकर घबराने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि सतर्क रहने की ज़रूरत है। अच्छी बात यह है कि इस जोखिम को कम करने के लिए हम बहुत कुछ कर सकते हैं:

  1. नियमित ब्रश करें: दिन में कम से कम दो बार, सुबह और रात को सोने से पहले, फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट से दाँतों को अच्छी तरह ब्रश करें।

  2. फ्लॉस का इस्तेमाल करें: दाँतों के बीच फँसे खाने के कणों और प्लाक को निकालने के लिए रोज़ाना फ्लॉस का उपयोग करें।

  3. माउथवॉश का प्रयोग: एंटीबैक्टीरियल माउथवॉश का इस्तेमाल मुँह के बैक्टीरिया को कम करने में मदद कर सकता है।

  4. नियमित दंत जाँच: हर 6 महीने या साल में एक बार अपने डेंटिस्ट के पास जाकर दाँतों की जाँच और सफाई ज़रूर करवाएँ।

  5. स्वस्थ आहार: मीठे और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन कम करें, क्योंकि ये बैक्टीरिया को पनपने में मदद करते हैं।

  6. धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान मसूड़ों की बीमारी का एक बड़ा कारण है और स्ट्रोक के जोखिम को भी बढ़ाता है।

अपने मुँह की सेहत का ख्याल रखना सिर्फ ताज़ी साँसों और चमकते दाँतों के लिए ही नहीं, बल्कि आपके समग्र स्वास्थ्य, खासकर आपके दिमाग को स्ट्रोक जैसे गंभीर खतरों से बचाने के लिए भी बेहद ज़रूरी है। तो अगली बार जब आप ब्रश करें, तो याद रखें कि आप सिर्फ अपने दाँतों को नहीं, बल्कि अपने जीवन को भी सुरक्षित रख रहे हैं।

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