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चश्मा उतार फेंकिए, शहरी भारतीयों के लिए आयुर्वेद बना आँखों का नया सुपरहीरो…

Throw away your glasses, Ayurveda has become the new eye superhero for urban Indians...

Breaking Today, Digital Desk : आजकल हम सब दिनभर किसी न किसी स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं – चाहे वो स्मार्टफोन हो, लैपटॉप हो या टीवी। इसका नतीजा? आँखों पर ज़ोर पड़ना, जिसे हम ‘डिजिटल आई स्ट्रेन’ कहते हैं। यह अब शहरी भारत में एक आम समस्या बन चुकी है। पहले कभी-कभार आँखों में थकान महसूस होती थी, पर अब यह रोज़ की बात हो गई है। आँखें जलना, खुजली होना, सिरदर्द और यहाँ तक कि धुंधला दिखना – ये सब इसी के लक्षण हैं।

अब ऐसे में लोग चश्मे की दुकानों के चक्कर काटते हैं, ड्रॉप्स डालते हैं, लेकिन समस्या जड़ से खत्म नहीं होती। ऐसे में, एक पुरानी भारतीय चिकित्सा पद्धति, आयुर्वेद, लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। लोग महसूस कर रहे हैं कि शायद यह समस्या का परमानेंट समाधान दे सके, बिना चश्मे के।

आयुर्वेद मानता है कि हमारी आँखें ‘तेज’ तत्व से बनी हैं और जब शरीर में वात और पित्त बिगड़ता है, तो आँखों पर असर पड़ता है। डिजिटल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (ब्लू लाइट) भी इस असंतुलन को बढ़ाती है।

आयुर्वेद में आँखों को स्वस्थ रखने के कई आसान और असरदार तरीके बताए गए हैं। जैसे, त्रिफला का इस्तेमाल। रात को त्रिफला पाउडर पानी में भिगोकर सुबह उस पानी से आँखें धोना बहुत फायदेमंद माना जाता है। इससे आँखों की सफाई होती है और ठंडक मिलती है।

इसके अलावा, आँखों के लिए कुछ खास आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ जैसे ‘सप्तामृत लौह’ और ‘महात्रिफला घृत’ भी बहुत लाभकारी होती हैं। इन्हें किसी आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से इस्तेमाल किया जा सकता है।

घी (गाय का शुद्ध घी) को भी आँखों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। रात को सोने से पहले आँखों के चारों ओर हल्के हाथों से घी की मालिश करने से थकान कम होती है और नमी बनी रहती है। साथ ही, कुछ ख़ास योगासन जैसे ‘त्राटक’ और ‘पालमिंग’ (दोनों हथेलियों से आँखों को ढकना) भी आँखों को आराम पहुँचाते हैं और उनकी रोशनी बढ़ाते हैं।

सबसे ज़रूरी बात, हमें अपनी डिजिटल आदतों पर भी थोड़ा कंट्रोल करना होगा। हर 20 मिनट पर स्क्रीन से नज़र हटाकर 20 सेकंड के लिए 20 फ़ीट दूर किसी चीज़ को देखने का नियम (20-20-20 रूल) बहुत काम आता है। साथ ही, स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखना और रात में डार्क मोड का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद है।

कुल मिलाकर, डिजिटल आई स्ट्रेन आज की सच्चाई है, लेकिन आयुर्वेद हमें इससे निपटने के लिए प्राकृतिक और प्रभावी रास्ते दिखाता है। यह सिर्फ आँखों की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शरीर के संतुलन की बात है। शहरी भारत अब इस पुरानी समझ को अपनाकर अपनी आँखों को नया जीवन दे रहा है – बिना किसी नए चश्मे के।

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