
Breaking Today, Digital Desk : साल 2016 में जब देश में नोटबंदी हुई थी, तब हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। लोग अपने पुराने नोट बदलने के लिए लंबी-लंबी लाइनों में लगे थे। ऐसे में, तमिलनाडु से एक ऐसी खबर सामने आई जिसने सबको हैरान कर दिया था। ये मामला जुड़ा था जयललिता की बेहद करीबी सहयोगी वी.के. शशिकला से, जिनके बारे में कहा गया कि उन्होंने नोटबंदी के ठीक बाद एक शुगर मिल खरीदने के लिए पूरे 450 करोड़ रुपये नकद में चुकाए थे।
सोचिए, जब आम आदमी 2000 या 4000 रुपये के लिए परेशान था, तब इतनी बड़ी रकम कैश में कैसे दी गई होगी? आरोप है कि यह लेन-देन ऐसे समय में हुआ जब पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट बंद हो चुके थे, और नए नोटों की कमी थी। ऐसे में इतनी बड़ी रकम का नकद भुगतान कई सवाल खड़े करता है।
यह मामला सिर्फ एक खरीद-फरोख्त का नहीं था, बल्कि इसने उस समय नोटबंदी के औचित्य और उसके पीछे के असल इरादों पर भी बहस छेड़ दी थी। सवाल उठने लगे थे कि क्या नोटबंदी वाकई काले धन पर लगाम लगा पाई थी, या फिर कुछ प्रभावशाली लोगों ने इसका फायदा उठा लिया था? इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में भी खूब हलचल मचाई और भ्रष्टाचार के आरोपों को फिर से हवा दे दी थी।






