
Breaking Today, Digital Desk : भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान भारतीय वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत बड़ी कार्रवाई करने का दावा किया है। वायुसेना प्रमुख के बयानों के अनुसार, इस ऑपरेशन में सतह से हवा में मार करने वाली एस-400 ‘सुदर्शन चक्र’ मिसाइल प्रणाली का इस्तेमाल करके 5 पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और एक विमानभेदी चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली (AWACS) विमान को मार गिराया गया। हालाँकि, पाकिस्तान ने इन दावों का खंडन करते हुए अपने किसी भी विमान के नुकसान से इनकार किया है और इसके बजाय कई भारतीय जेट विमानों को मार गिराने का दावा किया है।
यह घटनाक्रम अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक आतंकवादी हमले के बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव की पृष्ठभूमि में हुआ है, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हो गई थी। इस हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल अमर प्रीत सिंह के अनुसार, यह ऑपरेशन एक “राष्ट्रीय जीत” थी जिसे सभी एजेंसियों और बलों ने मिलकर बेहद पेशेवर तरीके से अंजाम दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस ऑपरेशन के दौरान वायु शक्ति के महत्व को साबित किया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय वायुसेना ने एस-400 ‘सुदर्शन चक्र’ रक्षा प्रणाली का उपयोग करते हुए पाकिस्तानी ड्रोनों और मिसाइलों को भी रोका, जो भारतीय शहरों को निशाना बना रहे थे। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि भारतीय विमानों ने नियंत्रण रेखा के पार आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया।
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने भारत के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने अपनी जवाबी कार्रवाई में 5 भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराया है, जिनमें तीन राफेल, एक सुखोई-30 और एक मिग-29 शामिल हैं। दोनों ही पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में सीमित सबूत पेश कर रहे हैं, जिससे स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि करना मुश्किल हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने दोनों देशों से संयम बरतने का आग्रह किया है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह घटना ‘ऑपरेशन सुदर्शन’ से अलग है, जो कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा 2019 में पंजाब और जम्मू में पाकिस्तान सीमा पर घुसपैठ रोधी ग्रिड को मजबूत करने के लिए चलाया गया एक अभ्यास था। ‘ऑपरेशन सुदर्शन’ का उद्देश्य सीमा पर बाड़ को मजबूत करना, सुरंगों का पता लगाना और निगरानी बढ़ाना था।




