
Breaking Today, Digital Desk : केरल कांग्रेस ने बिहार की ‘बिड़ी’ को लेकर एक ऐसा बयान दिया, जिस पर बीजेपी ने तुरंत आपत्ति जता दी। मामला इतना बढ़ गया कि सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक, इस पर खूब चर्चा हुई। लेकिन क्या ये विवाद इतना बड़ा था, जितना इसे बनाया गया? आइए जानते हैं पूरा माजरा।
दरअसल, केरल कांग्रेस ने तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर एक टिप्पणी की थी। इसी संदर्भ में उन्होंने बिहार की बिड़ी का ज़िक्र किया। उनका कहना था कि अगर बिड़ी पर टैक्स बढ़ता है, तो इससे मज़दूरों और गरीबों पर बोझ पड़ेगा। सुनने में तो यह एक आर्थिक मुद्दा लगता है, लेकिन बीजेपी ने इसे तुरंत लपक लिया और आरोप लगाया कि कांग्रेस बिहार के लोगों और वहां के उत्पाद का अपमान कर रही है।
बीजेपी का कहना था कि कांग्रेस ने जानबूझकर बिहार की बिड़ी का नाम लिया ताकि बिहार के लोगों को नीचा दिखाया जा सके। उनका तर्क था कि बिड़ी सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका का साधन है, और इस तरह से उसका ज़िक्र करना बिहार की संस्कृति और पहचान पर हमला है।
हालांकि, कांग्रेस ने तुरंत सफाई दी कि उनका इरादा किसी का अपमान करना नहीं था, बल्कि वे सिर्फ़ एक आर्थिक नीति पर बात कर रहे थे, जिसका गरीब वर्ग पर सीधा असर पड़ता है। उनका कहना था कि बिड़ी का ज़िक्र सिर्फ़ एक उदाहरण के तौर पर किया गया था, न कि किसी राज्य को बदनाम करने के लिए।
ये पहली बार नहीं है जब किसी छोटे से बयान को लेकर इतना बड़ा राजनीतिक बवाल खड़ा हुआ हो। अक्सर चुनाव से पहले या किसी बड़े मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयानबाजी को हवा दी जाती है। इस पूरे प्रकरण में यही लगता है कि एक साधारण सी टिप्पणी को राजनीतिक रंग देकर बेवजह तूल दिया गया।
क्या वाकई केरल कांग्रेस का इरादा बिहार का अपमान करना था? या बीजेपी ने इसे बिहार में अपनी पकड़ मज़बूत करने का एक मौक़ा समझ लिया? यह बहस तो जारी रहेगी, लेकिन इतना तय है कि इस तरह के छोटे-छोटे मुद्दों पर होने वाली राजनीति, कई बार असली समस्याओं से हमारा ध्यान भटका देती है।



