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यूपी विधानसभा में गूंजा पत्रकार सुरक्षा का सवाल, सरकार ने दिया आश्वासन…

The question of journalist safety was raised in UP assembly, the government gave assurance

Breaking Today, Digital Desk : उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन, राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। विपक्षी सदस्यों ने हाल ही में पत्रकारों के साथ हुई घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग की। सदन में फतेहपुर में हुए विवाद और प्रदेश में पत्रकारों पर हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चर्चा हुई।

विपक्षी विधायकों ने सीतापुर में पत्रकार राघवेंद्र की हत्या का मामला भी उठाया और सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का माहौल देने के लिए एक विशेष समिति का गठन करेगी। विधायकों ने बलिया पेपर लीक और हाथरस कांड का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों को उजागर करने वाले पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

इन सवालों के जवाब में, सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन को आश्वासन दिया कि सरकार पत्रकारों का पूरा सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जिन पत्रकारों का निधन हुआ, उनके परिवारों को सरकार ने 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है। सीतापुर में पत्रकार की हत्या के मामले पर उन्होंने कहा कि इस घटना के आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है और उनके संबंध समाजवादी पार्टी से जुड़ रहे हैं।

यह मुद्दा ऐसे समय में उठा है जब हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश में पत्रकारों को रिपोर्टिंग के दौरान चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। फरवरी 2023 में, विधानसभा परिसर में समाजवादी पार्टी के विरोध को कवर कर रहे पत्रकारों के साथ सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा हाथापाई की गई थी। इसके अलावा, फरवरी 2024 में पत्रकारों के सेंट्रल हॉल में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के फैसले की भी आलोचना हुई थी, जिसे कई लोगों ने मीडिया की स्वतंत्रता को बाधित करने का प्रयास बताया। इन घटनाओं ने प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

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