
Breaking Today, Digital Desk : इसका एक प्रमुख उदाहरण एंड्रोजन असंवेदनशीलता सिंड्रोम है। इस स्थिति वाले व्यक्ति में XY (पुरुष) क्रोमोसोम होते हैं और उनके शरीर में वृषण (testes) भी होते हैं जो टेस्टोस्टेरोन नामक पुरुष हार्मोन का उत्पादन करते हैं। हालांकि, एक आनुवंशिक भिन्नता के कारण, उनका शरीर इस हार्मोन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे पाता है। नतीजतन, बाहरी यौन अंग महिला के रूप में विकसित होते हैं। ऐसे व्यक्तियों का पालन-पोषण अक्सर लड़कियों के रूप में होता है और उन्हें अपनी स्थिति का पता तब चलता है जब यौवन के दौरान उन्हें मासिक धर्म नहीं होता।
एक और स्थिति स्वाइर सिंड्रोम (XY गोनैडल डिसजेनेसिस) है, जिसमें XY क्रोमोसोम वाले व्यक्ति के गोनैड (यौन ग्रंथियां) ठीक से विकसित नहीं होते हैं और वे हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाते। इसके परिणामस्वरूप, वे गर्भाशय और योनि सहित महिला आंतरिक और बाहरी अंगों के साथ पैदा होते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में “चिंताजनक प्रवृत्ति” क्या है?
यह “चिंताजनक प्रवृत्ति” किसी बीमारी के फैलने से संबंधित नहीं है, बल्कि यह उन चिकित्सा पद्धतियों और सामाजिक चुनौतियों को उजागर करती है, जिनका सामना इंटरसेक्स व्यक्तियों को करना पड़ता है। ऐतिहासिक रूप से, जब किसी बच्चे का जन्म ऐसे जननांगों के साथ होता था जो स्पष्ट रूप से पुरुष या महिला के नहीं लगते थे, तो डॉक्टर अक्सर माता-पिता को “सामान्य” बनाने वाली सर्जरी का सुझाव देते थे।
ये सर्जरी, जो अक्सर बिना बच्चे की सहमति के की जाती थीं, अपरिवर्तनीय होती थीं और इनसे आजीवन शारीरिक और मनोवैज्ञानिक पीड़ा हो सकती थी, जिसमें बांझपन और यौन संवेदना का खत्म होना शामिल है। ऑस्ट्रेलिया में मानवाधिकार समूहों और इंटरसेक्स अधिवक्ताओं ने इन गैर-जरूरी चिकित्सा हस्तक्षेपों के खिलाफ आवाज उठाई है।
हाल ही में, ऑस्ट्रेलियाई मेडिकल एसोसिएशन (AMA) ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें इंटरसेक्स भिन्नताओं को मानव विविधता के एक प्राकृतिक हिस्से के रूप में मान्यता दी गई है, न कि किसी ऐसी विकृति के रूप में जिसे ठीक करने की आवश्यकता है। यह प्रस्ताव इस बात की वकालत करता है कि जब तक व्यक्ति खुद सूचित सहमति देने में सक्षम न हो जाए, तब तक सभी गैर-जरूरी चिकित्सा हस्तक्षेपों को टाल दिया जाना चाहिए। यह एक बड़े बदलाव का संकेत है, जो व्यक्ति की शारीरिक स्वायत्तता और आत्मनिर्णय के अधिकार को प्राथमिकता देता है।
आगे का रास्ता
इंटरसेक्स होना किसी व्यक्ति की पहचान का एक स्वाभाविक हिस्सा है। ऑस्ट्रेलिया में, इंटरसेक्स पीयर सपोर्ट ऑस्ट्रेलिया (IPSA) जैसे संगठन प्रभावित व्यक्तियों और उनके परिवारों को महत्वपूर्ण सहायता और जानकारी प्रदान करते हैं। समाज में जागरूकता बढ़ने और चिकित्सा समुदाय के दृष्टिकोण में बदलाव के साथ, उम्मीद है कि इंटरसेक्स व्यक्तियों को कलंक और भेदभाव के बिना सम्मान और स्वीकृति के साथ जीने का अवसर मिलेगा। यह समझना महत्वपूर्ण है कि लिंग और पहचान सिर्फ क्रोमोसोम तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गहरा व्यक्तिगत और मानवीय अनुभव है।






