
Breaking Today, Digital Desk : भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाने के लिए फिटनेस कितनी ज़रूरी है, ये हम सब जानते हैं। खिलाड़ियों को यो-यो टेस्ट (Yo-Yo test) जैसे कई मानकों पर खरा उतरना पड़ता है। लेकिन हाल ही में एक ख़बर सामने आई है, जिसने सबको चौंका दिया है। बताया जा रहा है कि टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज़ विराट कोहली (Virat Kohli) अपना फिटनेस टेस्ट लंदन में दे रहे हैं। और हैरान करने वाली बात ये है कि वो ऐसा करने वाले इकलौते भारतीय क्रिकेटर हैं।
अब सवाल ये उठता है कि ऐसा क्यों? जब बाक़ी सभी खिलाड़ी भारत में ही राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (NCA) में अपना फिटनेस टेस्ट दे रहे हैं, तो विराट कोहली के लिए अलग व्यवस्था क्यों की गई है? क्या उन्हें कोई ख़ास छूट मिल रही है?
क्या कहते हैं नियम?
आमतौर पर, भारतीय टीम में शामिल होने वाले हर खिलाड़ी को बेंगलुरु स्थित NCA में ही फिटनेस टेस्ट (Fitness test) देना होता है। यह नियम सभी के लिए समान है, चाहे वो नया खिलाड़ी हो या टीम का सबसे बड़ा सितारा। इस टेस्ट में खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता, स्टेमिना और चोट से उबरने की स्थिति जाँची जाती है। इसका मक़सद ये सुनिश्चित करना है कि हर खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए पूरी तरह से फिट हो।
विराट कोहली का मामला अलग क्यों?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विराट कोहली इस समय लंदन में छुट्टी मना रहे थे। इसी दौरान उन्हें अपने फिटनेस टेस्ट के लिए बुलाया गया। अब अगर वो लंदन में ही हैं, तो क्या BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) ने उनके लिए वहीं टेस्ट की व्यवस्था कर दी? अगर ऐसा है, तो यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या यह सभी खिलाड़ियों के लिए एक समान नियम का उल्लंघन नहीं है?
कुछ लोग इसे विराट कोहली के कद और टीम में उनके महत्व से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि एक बड़े खिलाड़ी होने के नाते उन्हें कुछ रियायतें मिल रही हैं। वहीं, कुछ अन्य लोग इसे व्यावहारिक पक्ष से देख रहे हैं कि अगर खिलाड़ी विदेश में है और टेस्ट वहीं हो सकता है, तो इसमें क्या हर्ज़ है?
क्या होगा इसका असर?
अगर विराट कोहली को यह ख़ास सुविधा दी जा रही है, तो इससे टीम के दूसरे खिलाड़ियों पर क्या असर पड़ेगा? क्या भविष्य में दूसरे बड़े खिलाड़ी भी ऐसी ही माँग कर सकते हैं? यह टीम के अंदर एक असंतुलन पैदा कर सकता है और पारदर्शिता पर सवाल उठा सकता है।
BCCI को इस मामले पर सफ़ाई देनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की शंका दूर हो सके। फिटनेस टेस्ट सिर्फ़ खेल का हिस्सा नहीं, बल्कि टीम में अनुशासन और निष्पक्षता का भी प्रतीक है। सभी खिलाड़ियों के लिए एक जैसे नियम होने चाहिए, तभी टीम भावना और प्रतिस्पर्धा सही मायने में मज़बूत होगी।






