
Breaking Today, Digital Desk : दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं है, यह भारतीय राजनीति की नर्सरी भी रही है। यहां के छात्र संघ चुनाव (DUSU elections) हमेशा से गहमागहमी भरे रहे हैं और कई ऐसे चेहरे इन चुनावों से निकले हैं जिन्होंने आगे चलकर देश की राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल किया। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही पूर्व अध्यक्षों के बारे में जिन्होंने DU से निकलकर राजनीतिक ऊंचाइयों को छुआ।
अरुण जेटली: एक दिग्गज राजनेता का उदय
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का राजनीतिक सफर दिल्ली विश्वविद्यालय से ही शुरू हुआ था। वे 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के अध्यक्ष चुने गए थे। छात्र राजनीति में उनकी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें आगे चलकर राष्ट्रीय राजनीति में एक मजबूत पहचान दिलाई। आपातकाल के दौरान उन्होंने छात्र नेता के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जेटली जी ने केंद्रीय मंत्री के रूप में कई अहम मंत्रालय संभाले और अपनी छाप छोड़ी।
विजय गोयल: खेल और राजनीति का संगम
बीजेपी के एक और वरिष्ठ नेता विजय गोयल भी DU छात्र राजनीति की देन हैं। वे 1982 में DUSU के अध्यक्ष बने थे। गोयल ने छात्र राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाई। वे केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और खेल तथा युवा मामलों में उनकी विशेष रुचि रही है।
अजय माकन: कांग्रेस के युवा चेहरे
कांग्रेस पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक अजय माकन भी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। वे 1985 में इस पद पर चुने गए थे। माकन ने दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई है और वे दिल्ली सरकार में मंत्री पद पर भी रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने पार्टी में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाली हैं।
अल्का लांबा: छात्र राजनीति से मुख्यधारा तक
आम आदमी पार्टी (AAP) की नेता अल्का लांबा भी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्होंने 1995 में DUSU का चुनाव जीता था। लांबा ने छात्र राजनीति के बाद कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की और बाद में AAP में शामिल हो गईं। वे दिल्ली विधानसभा की सदस्य भी रह चुकी हैं।
रेखा गुप्ता: वर्तमान में एक मजबूत आवाज
वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की सदस्य रेखा गुप्ता भी DUSU की पूर्व अध्यक्ष रही हैं। वे 1996 में इस पद पर चुनी गई थीं। रेखा गुप्ता लंबे समय से शिक्षा और छात्र हितों के लिए काम कर रही हैं और विश्वविद्यालय की नीतियों में उनकी अहम भूमिका रहती है।
दिल्ली विश्वविद्यालय: राजनीति की पाठशाला
ये कुछ ऐसे नाम हैं जो दिखाते हैं कि दिल्ली विश्वविद्यालय सिर्फ किताबों और डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक समझ विकसित करने का एक महत्वपूर्ण मंच भी है। यहां के छात्र संघ चुनाव युवा नेताओं को अपनी बात रखने, भीड़ को जुटाने और संगठनात्मक कौशल सीखने का अवसर देते हैं। यही वजह है कि DU को भारतीय राजनीति की एक महत्वपूर्ण पाठशाला के रूप में देखा जाता है। आने वाले समय में भी यहां से कई ऐसे नेता निकलेंगे जो देश की दशा और दिशा तय करने में अपनी भूमिका निभाएंगे।






