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लंदन की सड़कें पान के लाल धब्बों से बदरंग, स्थानीय निवासियों में भारी नाराजगी…

London's streets are discoloured with red betel stains, local residents are extremely angry

Breaking Today, Digital Desk : लंदन की सड़कों पर पान और गुटखे की पीक के लाल धब्बे एक बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं, जिससे स्थानीय निवासियों और अधिकारियों में भारी गुस्सा है. यह घिनौनी आदत, विशेष रूप से शहर के उन इलाकों में जहाँ दक्षिण एशियाई समुदाय की बड़ी आबादी है, स्वच्छता और सार्वजनिक शिष्टाचार को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ चुकी है

लंदन के हैरो, ब्रेंट और लीसेस्टर जैसे इलाकों में फुटपाथ, कूड़ेदान और दीवारें पान की पीक से रंगी पड़ी हैं हाल ही में हैरो की सड़कों का एक वीडियो वायरल होने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है, जिसमें इन लाल धब्बों को दिखाया गया था, जिसे लोगों ने “शर्मनाक और घृणित” बताया.

यह समस्या कोई नई नहीं है. पिछले एक दशक से भी अधिक समय से स्थानीय काउंसिल इससे निपटने की कोशिश कर रही हैं. ब्रेंट काउंसिल जैसे स्थानीय निकाय हर साल इन दागों को साफ करने के लिए हजारों पाउंड खर्च करते हैं. इन धब्बों को हटाना बेहद मुश्किल और महंगा काम है, जिसके लिए विशेष सफाई टीमों और उच्च दबाव वाले पानी की आवश्यकता होती है

इस समस्या से निपटने के लिए, कई परिषदों ने सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर जुर्माना लगाया है, जो 80 से 100 पाउंड तक हो सकता है कुछ क्षेत्रों में, अंग्रेजी और गुजराती दोनों भाषाओं में चेतावनी वाले साइनबोर्ड भी लगाए गए हैं ताकि लोगों को इस असामाजिक व्यवहार के प्रति आगाह किया जा सके

हालांकि, इन सभी प्रयासों के बावजूद, समस्या जस की तस बनी हुई है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह न केवल देखने में भद्दा लगता है, बल्कि यह अस्वच्छ भी है कई लोग इन लाल धब्बों को सूखे खून के धब्बे समझकर डर जाते हैं, जिससे अपराध का भय भी बढ़ता है

यह मुद्दा केवल साफ-सफाई तक ही सीमित नहीं है, इसके स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर परिणाम भी हैं. पान और तंबाकू चबाना मुंह के कैंसर के बढ़ते खतरे से जुड़ा हुआ है

इस आदत के कारण प्रवासी समुदायों, विशेष रूप से भारतीयों की आलोचना भी हो रही है, जिससे एक सांस्कृतिक टकराव की स्थिति पैदा हो रही है अधिकारी और स्थानीय नेता लोगों को शिक्षित करने और इस आदत को रोकने के लिए सामुदायिक अभियानों पर जोर दे रहे हैं, लेकिन समस्या की व्यापकता को देखते हुए और सख्त कदमों की मांग भी उठ रही है

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