
Breaking Today, Digital Desk : न्यूयॉर्क शहर, जिसे सपनों का शहर कहा जाता है, सोमवार शाम एक दर्दनाक गोलीकांड से दहल गया. इस घटना ने न केवल कई जानें लीं, बल्कि एक ऐसे नायक को भी हमसे छीन लिया जो अपनी जड़ों को बांग्लादेश में छोड़कर अमेरिका की सेवा में लगा था. 36 वर्षीय पुलिस अधिकारी दीदारुल इस्लाम, जो इस गोलीबारी में मारे गए, एक बांग्लादेशी अप्रवासी थे, जिन्होंने चार साल पहले न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (एनवाईपीडी) में भर्ती होकर शहर की रक्षा की शपथ ली थी.
दीदारुल इस्लाम सिर्फ एक पुलिस अधिकारी नहीं थे, बल्कि एक loving पति और दो छोटे बेटों के पिता भी थे. उनका परिवार एक और खुशी का इंतजार कर रहा था, क्योंकि उनकी पत्नी गर्भवती थीं और जल्द ही उनके तीसरे बच्चे को जन्म देने वाली थीं. लेकिन मैनहट्टन की एक ऊंची इमारत में एक बंदूकधारी द्वारा की गई अंधाधुंध गोलीबारी ने इस परिवार के सपनों को हमेशा के लिए चकनाचूर कर दिया.
घटना के दिन, अधिकारी इस्लाम मैनहट्टन के एक ऑफिस बिल्डिंग में अतिरिक्त सुरक्षा के लिए तैनात थे. तभी लास वेगास के एक 27 वर्षीय बंदूकधारी शेन तमूरा ने इमारत में घुसकर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. अपनी जान की परवाह न करते हुए, अधिकारी इस्लाम ने दूसरों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन क्रूर गोलियों का शिकार हो गए. इस हमले में अधिकारी इस्लाम सहित चार लोगों की मौत हो गई, और बाद में हमलावर ने खुद को भी गोली मार ली.
न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स ने अधिकारी इस्लाम को “एक सच्चा नायक” बताते हुए श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा, “वह इस शहर से प्यार करते थे और ईश्वर में आस्था रखने वाले व्यक्ति थे.” पुलिस कमिश्नर जेसिका टिस्क ने कहा, “उन्होंने खुद को खतरे में डाला. उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया.”
दीदारुल इस्लाम की कहानी एक ऐसे अप्रवासी की कहानी है जो बेहतर भविष्य की तलाश में अमेरिका आया और इस देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए. उनका बलिदान न्यूयॉर्क शहर और पूरे अप्रवासी समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति है. वह हमेशा एक ऐसे नायक के रूप में याद किए जाएंगे जिन्होंने वर्दी की शान और मानवता की सेवा को सर्वोपरि रखा.




