
Breaking Today, Digital Desk : भारतीय क्रिकेट टीम के “दीवार” कहे जाने वाले चेतेश्वर पुजारा ने 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (BGT) में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली ऐतिहासिक जीत को याद किया है। उस श्रृंखला के दौरान, खासकर ब्रिस्बेन के गाबा में हुए आखिरी टेस्ट मैच में, पुजारा ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों के सामने चट्टान की तरह खड़े हो गए थे। उन्होंने अपने शरीर पर कई गेंदें झेलीं ताकि टीम इंडिया उस ऐतिहासिक जीत को दर्ज कर सके।
पुजारा ने उन दर्दनाक पलों को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने टीम के लिए दर्द सहा। गाबा टेस्ट की दूसरी पारी में पुजारा ने 211 गेंदों का सामना करते हुए 56 रन बनाए थे। इस दौरान पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड जैसे गेंदबाजों की कई गेंदें उनके शरीर पर लगीं।
एक साक्षात्कार में पुजारा ने कहा, “जब आपको बार-बार गेंद लगती है, तो दर्द होता है। ये आसान नहीं होता।” उन्होंने बताया कि गाबा की पिच पर असमान उछाल था, जिसके कारण गेंदों को बल्ले से खेलना जोखिम भरा हो सकता था। कैच आउट होने के खतरे से बचने के लिए उन्होंने अपने शरीर पर गेंदें झेलने का फैसला किया।
पुजारा ने यह भी खुलासा किया कि उस श्रृंखला के दौरान उनकी उंगली में भी चोट थी, जिसके कारण उन्हें बल्ला पकड़ने में भी दिक्कत हो रही थी। इसके बावजूद वे मैदान पर डटे रहे और युवा खिलाड़ियों जैसे शुभमन गिल और ऋषभ पंत को खुलकर खेलने का मौका दिया।
उनकी इस साहसी पारी ने न केवल ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों को थका दिया, बल्कि भारत की उस युवा टीम में जोश भी भर दिया, जिसने आखिरकार गाबा में ऑस्ट्रेलिया के 32 साल के अपराजेय रिकॉर्ड को तोड़ दिया और श्रृंखला 2-1 से अपने नाम कर ली।






