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यूक्रेन पर शांति वार्ता, पुतिन ने कहा- समस्या की जड़ खत्म हो, तभी बनेगा समाधान…

Peace talks on Ukraine, Putin said- the root of the problem should be eliminated, only then will a solution be found

Breaking Today, Digital Desk : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के साथ किसी भी संभावित शांति समझौते के लिए अपनी प्रमुख शर्त को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है.[1] पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते का आधार संघर्ष के “मूल कारणों का उन्मूलन” होना चाहिए. पुतिन का यह बयान उस शिखर सम्मेलन के बाद आया है, जिसमें दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के तरीकों पर चर्चा हुई.

पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि केवल जमीनी हकीकत को स्वीकार करने से ही बात नहीं बनेगी, बल्कि उन गहरी चिंताओं को भी दूर करना होगा जिनके कारण यह सैन्य अभियान शुरू हुआ. क्रेमलिन के अनुसार, इन “मूल कारणों” में यूक्रेन का गैर-नाटो सदस्य के रूप में तटस्थ रहना, उसका विसैन्यीकरण और रूस की सुरक्षा गारंटियों को सुनिश्चित करना शामिल है.

रिपोर्टों के अनुसार, अलास्का में हुई बैठक के दौरान पुतिन ने ट्रंप को बताया कि यदि यूक्रेन डोनेट्स्क और लुहान्स्क क्षेत्रों को छोड़ दे, तो वह बाकी अग्रिम मोर्चों पर लड़ाई रोकने के लिए तैयार होंगे. पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपनी मुख्य मांगों से पीछे नहीं हटेंगे इसके बदले में, रूसी सेना दक्षिणी यूक्रेन के खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया क्षेत्रों में अपने आक्रमण को रोक देगी.

डोनाल्ड ट्रंप ने भी बैठक को “बेहद उपयोगी” बताते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच अच्छी और भरोसेमंद बातचीत हुई. उन्होंने कहा कि युद्ध को समाप्त करने का सबसे अच्छा तरीका सीधे एक शांति समझौते पर पहुंचना है, न कि केवल युद्धविराम करना, जो अक्सर टिकते नहीं हैं इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने किसी भी तरह से अपना क्षेत्र छोड़ने की बात को लगातार खारिज किया है और वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कायम हैं.

इस बैठक और पुतिन के बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है. जहां एक ओर रूस इसे अपनी कूटनीतिक जीत के तौर पर देख रहा है, वहीं कई यूरोपीय देश और यूक्रेन इसे रूस द्वारा अपनी शर्तों को थोपने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं विश्लेषकों का मानना है कि जब तक दोनों पक्ष अपने कट्टर रुख में नरमी नहीं लाते, तब तक स्थायी शांति की राह मुश्किल बनी रहेगी. ज़ेलेंस्की की आगामी वाशिंगटन यात्रा पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं, जहां इस मुद्दे पर आगे की दिशा तय हो सकती है

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