
Breaking Today, Digital Desk : भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने हाल ही में एक बहुत ही अहम बात कही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बड़े सुधारों की वकालत की है और साफ-साफ कहा है कि भारत और जापान जैसे देशों को इसमें स्थायी सीट मिलनी चाहिए। यह बात उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ एक मुलाकात के दौरान कही, जिससे यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
आज की दुनिया में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बनावट कहीं न कहीं पुरानी पड़ चुकी है। आज से 70-80 साल पहले जब यह बनी थी, तब दुनिया बिल्कुल अलग थी। अब एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों की ताकत और भूमिका काफी बढ़ गई है, लेकिन UNSC में उनकी सही नुमाइंदगी नहीं है।
प्रधानमंत्री तोबगे का कहना है कि UNSC को और ज़्यादा प्रभावी और सबको साथ लेकर चलने वाला बनाना ज़रूरी है। ऐसा तभी हो पाएगा जब इसमें नए सदस्य जोड़े जाएं, खासकर उन देशों को जिनकी वैश्विक स्तर पर भूमिका बड़ी हो गई है। उन्होंने भारत और जापान का नाम विशेष रूप से लिया, जो आर्थिक और सामरिक, दोनों ही तरह से दुनिया के महत्वपूर्ण देश हैं।
यह कोई नई बात नहीं है कि भारत UNSC में स्थायी सीट की मांग कर रहा है। भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है, एक बड़ी अर्थव्यवस्था है और वैश्विक शांति अभियानों में भी अहम भूमिका निभाता रहा है। इसी तरह जापान भी एक आर्थिक महाशक्ति है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसका भी काफी प्रभाव है।
भूटान जैसे छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश का यह समर्थन भारत की दावेदारी को और मज़बूत करता है। यह दिखाता है कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि उसके पड़ोसी और मित्र देश भी मानते हैं कि UNSC को समय के साथ बदलना ज़रूरी है। यह वैश्विक शक्ति संतुलन को सही करने और संयुक्त राष्ट्र को और ज़्यादा प्रासंगिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
अब देखना यह होगा कि इस मांग को बाकी दुनिया के देश कितना गंभीरता से लेते हैं और कब तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वो बदलाव आते हैं जिनकी आज के समय में वाकई ज़रूरत है।




