नवरात्रि 9 नहीं, इस बार पूरे 10 दिन का उत्सव! जानिए क्या है वजह और शुभ तिथियां…
This time Navratri is not a 9 day festival, but a 10 day festival! Know the reason and auspicious dates...

Breaking Today, Digital Desk : नवरात्रि, हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जो देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और शक्ति का प्रतीक है। साल 2025 में आने वाली नवरात्रि अपने साथ कुछ बेहद खास ज्योतिषीय संयोग लेकर आ रही है, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बना देगा। यह सिर्फ उपवास और पूजा का समय नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, शुद्धि और नई शुरुआत का भी अवसर है। आइए जानते हैं 2025 की नवरात्रि की महत्वपूर्ण तिथियां, दुर्लभ संयोग और इसका महत्व।
2025 में नवरात्रि कब है?
साल 2025 में चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि, दोनों ही तिथियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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चैत्र नवरात्रि 2025:
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प्रतिपदा (घटस्थापना): 29 मार्च 2025, शनिवार
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महाष्टमी: 6 अप्रैल 2025, रविवार
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महानवमी: 7 अप्रैल 2025, सोमवार
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दशमी (दशहरा): 8 अप्रैल 2025, मंगलवार
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शारदीय नवरात्रि 2025:
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प्रतिपदा (घटस्थापना): 22 सितंबर 2025, सोमवार
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महाष्टमी: 30 सितंबर 2025, मंगलवार
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महानवमी: 1 अक्टूबर 2025, बुधवार
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दशमी (दशहरा): 2 अक्टूबर 2025, गुरुवार
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दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग: क्या है खास?
2025 की नवरात्रि में कई ऐसे दुर्लभ ग्रह-नक्षत्रों के योग बन रहे हैं, जो ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत शुभ माने जा रहे हैं। इन संयोगों के कारण इस दौरान की गई पूजा-अर्चना और साधना का फल कई गुना अधिक मिलेगा। कुछ प्रमुख संयोगों में ग्रहों की विशेष स्थिति, नक्षत्रों का गोचर और शुभ योगों का निर्माण शामिल है। ये संयोग भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति, धन-समृद्धि और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में सहायता करेंगे।
दस दिवसीय उत्सव: हर दिन का महत्व
नवरात्रि का प्रत्येक दिन देवी दुर्गा के एक विशेष रूप को समर्पित होता है। इन नौ दिनों में भक्तगण मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना करते हैं। दसवां दिन विजयादशमी या दशहरा के रूप में मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
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पहला दिन (प्रतिपदा): मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना।
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दूसरा दिन (द्वितीया): मां ब्रह्मचारिणी की आराधना।
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तीसरा दिन (तृतीया): मां चंद्रघंटा की पूजा।
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चौथा दिन (चतुर्थी): मां कूष्मांडा की उपासना।
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पांचवा दिन (पंचमी): मां स्कंदमाता की आराधना।
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छठा दिन (षष्ठी): मां कात्यायनी की पूजा।
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सातवां दिन (सप्तमी): मां कालरात्रि की उपासना।
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आठवां दिन (अष्टमी): मां महागौरी की पूजा और कन्या पूजन।
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नौवां दिन (नवमी): मां सिद्धिदात्री की आराधना और हवन।
नवरात्रि में क्या करें और क्या न करें?
नवरात्रि के दौरान सात्विक जीवन शैली अपनाना चाहिए। उपवास रखने वाले अन्न का त्याग करते हैं और फल, दूध, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा आदि का सेवन करते हैं। इस दौरान मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और सकारात्मक माहौल बनाए रखें।
2025 की नवरात्रि भक्तों के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आ रही है। यह समय न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का है, बल्कि अपने भीतर की शक्ति को जगाने और आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाने का भी है। इन दुर्लभ संयोगों का लाभ उठाएं और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करें।






