
Breaking Today, Digital Desk : महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता छगन भुजबल ने एक बार फिर आरक्षण के मुद्दे पर अपनी राय रखी है. उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि आरक्षण का मकसद गरीबी हटाना नहीं है, बल्कि यह प्रतिनिधित्व का मामला है. उनके इस बयान से एक नई बहस छिड़ गई है.
भुजबल ने कहा, “आरक्षण का गरीबी से कोई लेना-देना नहीं है. यह उन समुदायों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए है जिन्हें सदियों से दबाया गया है और उनका हक मारा गया है. अगर आर्थिक आधार पर आरक्षण देना है, तो फिर गरीबी हटाओ योजनाएं क्यों हैं? आरक्षण तो प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का एक जरिया है.”
उन्होंने आगे कहा कि अगर हम केवल आर्थिक आधार पर आरक्षण देंगे, तो इससे उन लाखों लोगों का क्या होगा जिन्हें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े होने के कारण सदियों से भेदभाव का सामना करना पड़ा है? आरक्षण का मूल सिद्धांत सामाजिक न्याय है, न कि आर्थिक सहायता.
भुजबल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में आर्थिक आधार पर आरक्षण (EWS) को लेकर भी बहस चल रही है. कई लोग EWS आरक्षण का समर्थन करते हैं, तो वहीं कई लोग इसे आरक्षण के मूल ढांचे के खिलाफ मानते हैं.






